
सरायकेला – माननीय झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सरायकेला-खरसावां द्वारा विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर पारा विधिक स्वयंसेवकों (पीएलवी) के लिए क्षमता संवर्धन कार्यक्रम सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पारा विधिक स्वयंसेवकों, विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों, हितधारकों तथा बाल अधिकार एवं विधिक सहायता से जुड़े व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य पारा विधिक स्वयंसेवकों की क्षमता में वृद्धि करना तथा बाल श्रम की समस्या, बच्चों के संरक्षण हेतु उपलब्ध कानूनी प्रावधानों एवं बाल श्रमिकों के पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री तौसीफ मेराज, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सरायकेला-खरसावां ने बाल अधिकारों एवं बाल श्रम से संबंधित विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाल श्रम बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है तथा उनके शारीरिक, मानसिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने पारा विधिक स्वयंसेवकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे बाल श्रम की पहचान, पीड़ित बच्चों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने तथा उनके पुनर्वास में महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करते हैं।

उन्होंने बच्चों के संरक्षण हेतु उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं विधिक सहायता तंत्र की जानकारी देते हुए कहा कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए सरकार, विधिक सेवा संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों एवं समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा।
अपने संबोधन के दौरान श्री तौसीफ मेराज ने बाल श्रम में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई संबंधी प्रावधानों की भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986, कारखाना अधिनियम, खान अधिनियम तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A, 24, 39(ई) एवं 39(एफ) बच्चों को श्रम से सुरक्षा प्रदान करते हैं तथा उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और समुचित विकास का अधिकार सुनिश्चित करते हैं।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति, नियोक्ता, प्रतिष्ठान अथवा संगठन के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जा सकती है। बाल श्रमिकों को नियोजित करने वाले नियोक्ता को छह माह से तीन वर्ष तक के कारावास तथा ₹20,000 से ₹50,000 तक के जुर्माने अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। उन्होंने सभी हितधारकों से अपील की कि वे बाल श्रम की किसी भी घटना की सूचना तत्काल संबंधित प्राधिकारियों को दें ताकि प्रभावित बच्चों का शीघ्र उद्धार एवं पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम में उपस्थित परिवीक्षाधीन उप समाहर्ता श्री नवीन कुमार बाड़ा एवं श्री विष्णु मुंडा ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने बाल श्रम के सामाजिक, आर्थिक एवं कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि बाल श्रम उन्मूलन में सामुदायिक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पारा विधिक स्वयंसेवकों से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जागरूकता फैलाने तथा बाल श्रम की घटनाओं की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बाल श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों, बच्चों के अधिकारों, पुनर्वास योजनाओं तथा निवारक उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सम्मान, सुरक्षा एवं स्वस्थ बचपन का अधिकार प्राप्त है।
कार्यक्रम के अंत में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने बाल श्रम उन्मूलन हेतु सक्रिय रूप से कार्य करने तथा बाल श्रम की किसी भी घटना की जानकारी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करने की शपथ ली। सभी ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा एवं बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम का समापन बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों के अधिकारों के संरक्षण तथा उनके सुरक्षित, सम्मानजनक एवं उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
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