
औरंगाबाद से अविनाश कुमार की रिपोर्ट।
औरंगाबाद: बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), औरंगाबाद के तत्वावधान में जिले के विभिन्न विद्यालयों में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान नारायणा मिशन स्कूल, अनुग्रह मध्य विद्यालय एवं ओबरा उच्च विद्यालय में छात्र-छात्राओं को बाल अधिकार, बाल संरक्षण और विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।

नारायणा मिशन स्कूल, औरंगाबाद में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव श्रीमती तान्या पटेल, जिला शिक्षा पदाधिकारी दया शंकर सिंह, अधिवक्ता अभिनंदन कुमार, पैनल अधिवक्ता सुबोध कुमार सिंह एवं विद्यालय के प्रबंध निदेशक वीरेंद्र कुमार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान सचिव तान्या पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि सुरक्षित बचपन ही सुरक्षित भविष्य की पहचान है। बच्चों को भयमुक्त, सुरक्षित, सम्मानजनक एवं शोषणमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना केवल अभिभावकों या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी प्रकार के शारीरिक, मानसिक या यौन शोषण की स्थिति में चुप नहीं रहने की अपील की।
उन्होंने बाल श्रम, बाल विवाह, बाल तस्करी, बाल यौन शोषण एवं साइबर अपराधों के प्रति बच्चों को सचेत किया। साथ ही POCSO अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम एवं बाल एवं किशोर श्रम निषेध कानून सहित बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
जिला शिक्षा पदाधिकारी दया शंकर सिंह ने कहा कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उनके सुरक्षित भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
अधिवक्ता अभिनंदन कुमार ने साइबर सुरक्षा पर विस्तार से जानकारी देते हुए बच्चों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, निजी फोटो एवं वीडियो के दुरुपयोग तथा अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क के खतरों के प्रति आगाह किया। उन्होंने बच्चों को अपना ओटीपी, पासवर्ड एवं व्यक्तिगत जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी।
पैनल अधिवक्ता सुबोध कुमार सिंह ने सुरक्षित बचपन अभियान के उद्देश्यों एवं बाल संरक्षण में विद्यालय, अभिभावकों और समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं विद्यालय के प्रबंध निदेशक वीरेंद्र कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के शिक्षक यश कुमार ने किया। इस दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्र-छात्राओं, विशेषकर छात्राओं ने बाल अधिकार, साइबर सुरक्षा एवं बाल शोषण से संबंधित कई सवाल पूछे। अतिथियों ने सरल भाषा में उनके सवालों का जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
अन्य विद्यालयों में भी हुआ जागरूकता कार्यक्रम
इसी अभियान के तहत अनुग्रह मध्य विद्यालय, औरंगाबाद में पैनल अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही एवं गोविंद सिंह की सहभागिता में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं ओबरा उच्च विद्यालय में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मदन मोहन प्रसाद ने कार्यक्रम में भाग लेकर छात्र-छात्राओं को बाल अधिकारों एवं संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
इन कार्यक्रमों में बच्चों को बाल श्रम, बाल विवाह, बाल तस्करी, बाल यौन शोषण एवं विभिन्न प्रकार के दुर्व्यवहार के प्रति जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान एवं भयमुक्त वातावरण में जीवन जीने का अधिकार है। किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में बच्चों को अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
वक्ताओं ने अभिभावकों एवं शिक्षकों से बच्चों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनके लिए विश्वासपूर्ण वातावरण तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका वक्ताओं ने सहज एवं सरल भाषा में जवाब दिया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की ओर से संचालित ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का उद्देश्य बच्चों को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना, बाल अपराधों एवं शोषण की रोकथाम करना तथा समाज में बच्चों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना है।
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