
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों का एक प्रमुख निर्यातक बनाने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। इस लक्ष्य के तहत भारत को 100 देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात करने के लिए तैयार किया जा रहा है, जो वैश्विक बाज़ार में देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। यह घोषणा भारत के विनिर्माण और तकनीकी कौशल को दर्शाती है, जिससे वह इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने की राह पर है।
यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य भारतीय कंपनियों की क्षमता में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जो न केवल घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बनने के लिए काम कर रही हैं। यह सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी नीतियों का परिणाम है, जिन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को बढ़ावा दिया है। इन पहलों में इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी देने के लिए फेम-II (FAME-II) योजना और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई (PLI) योजनाओं जैसे उपाय शामिल हैं।

प्रधानमंत्री का बयान इस बात पर ज़ोर देता है कि भारत उच्च गुणवत्ता और किफायती इलेक्ट्रिक वाहन बनाने में सक्षम है, जो वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। यह भारत के तेज़ी से विकास कर रहे तकनीकी परिदृश्य और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का प्रमाण है।

इस कदम से भारत को न केवल आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। यह भारत को वैश्विक मंच पर एक ज़िम्मेदार और दूरदर्शी राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगा, जो सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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