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Adityapur : कोल्हान की राजनीति में बड़ा बदलाव: झामुमो बूथ सम्मेलन में कांग्रेस छोड़ केपी सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल,सैकड़ों समर्थक भी आए साथ

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BySubhasish Kumar

Jun 3, 2026
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सरायकेला: कोल्हान की राजनीति में बुधवार को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। वरिष्ठ शिक्षाविद्, झारखंड आंदोलनकारी और कांग्रेस के पूर्व नेता कालीपद सोरेन उर्फ केपी सोरेन ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का दामन थाम लिया। जिला मुख्यालय स्थित टाउन हॉल सभागार में आयोजित मिलन समारोह में झामुमो नेतृत्व ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
कार्यक्रम में सिंहभूम सांसद जोबा माझी, मंत्री दीपक बिरुआ, खरसावां विधायक दशरथ गागराई, ईचागढ़ विधायक सविता महतो, जिलाध्यक्ष डॉ. शुभेंदु महतो तथा झामुमो महासचिव विनोद पांडे मौजूद रहे। पार्टी नेताओं ने केपी सोरेन को पार्टी का पट्टा पहनाकर औपचारिक रूप से झामुमो की सदस्यता दिलाई।
*कांग्रेस से दूरी, झामुमो पर भरोसा*
लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति से जुड़े रहे केपी सोरेन ने हाल ही में पार्टी से इस्तीफा दिया था। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अपने मूल सामाजिक सरोकारों और जल, जंगल, जमीन से जुड़े मुद्दों से दूर होती जा रही है। उनके इस्तीफे के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज थीं, जिस पर अब विराम लग गया है।
*शिक्षाविद् और आंदोलनकारी के रूप में अलग पहचान*
केपी सोरेन की पहचान केवल एक राजनीतिक चेहरे के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षाविद् और झारखंड आंदोलन के वैचारिक स्तंभों में भी रही है। भूगोल और संथाली विषय में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने वाले केपी सोरेन ने राम मनोहर लोहिया कॉलेज में भूगोल के प्राध्यापक और बाद में रांची कॉलेज में संथाली भाषा के प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
झारखंड आंदोलन के दौरान उनका जुड़ाव प्रसिद्ध चिंतक डॉ. राम दयाल मुंडा की टीम से रहा। इसके अलावा वे झारखंडी विचारधारा के प्रमुख हस्ताक्षरों निर्मल मिंज और बीपी केशरी के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे।
*युवाओं के लिए काम करने की जताई इच्छा*
झामुमो में शामिल होने के बाद केपी सोरेन ने कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, उसका वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने अनुभव और ज्ञान को झारखंड के युवाओं तक पहुंचाना है, ताकि नई पीढ़ी को सही दिशा और वैचारिक मार्गदर्शन मिल सके।
*हेमंत सोरेन के नेतृत्व की सराहना*
केपी सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनमें झारखंड को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि झामुमो योग्य और अनुभवी लोगों को अवसर देने की नीति पर काम कर रही है, जो उसकी दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केपी सोरेन जैसे शिक्षित और आंदोलनकारी पृष्ठभूमि वाले नेता का झामुमो में शामिल होना केवल संगठनात्मक विस्तार नहीं है। इससे पार्टी को आदिवासी समाज, भाषा-संस्कृति संरक्षण, शिक्षा, नीति निर्माण और संगठनात्मक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में भी वैचारिक मजबूती मिल सकती है।
*आदित्यपुर के दो प्रमुख चेहरे भी हुए शामिल*
केपी सोरेन के साथ आदित्यपुर के सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता संजय कुमार और अभय झा ने भी झामुमो की सदस्यता ग्रहण की। दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावशाली जनाधार रखते हैं। राजनीतिक जानकार इसे इस संकेत के रूप में देख रहे हैं कि झामुमो अब विभिन्न समुदायों और वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। कोल्हान की राजनीति में केपी सोरेन की यह नई पारी आने वाले दिनों में क्या असर डालती है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। उनके अनुभव, वैचारिक समझ और संगठनात्मक क्षमता का झामुमो किस तरह उपयोग करती है, यह भविष्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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