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भारती परिवार ने धूमधाम से मनाया अगहनी काली पूजा

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ByAdmin Office

Dec 14, 2023
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देवघर। काली, कालिका या महाकाली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। वे मृत्यु, काल और परिवर्तन की देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली आदिशक्ति दुर्गा माता का काला, विकराल और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति असुरों के संहार के लिये हुई थी। उनको विशेषतः बंगाल, ओडिशा और असम में पूजा जाता है। काली को शाक्त परम्परा की दस महाविद्याओं में से एक भी माना जाता है। अगहन मास के अमावस्या को हेमंती मां काली की पूजा भारत में धूमधाम से मनाई गई। इसी क्रम में भारती पुस्तक प्रतिष्ठान परिवार ने भी तन मन से पूजा अर्चना की। विगत 36 वर्षों से इस परिवार पूजा करते आ रहे हैं। पुजारी ब्रह्माशंकर शास्त्री एवं पंडित सुधीर जजवाड़े ने विधिपूर्वक पूजा की। ब्रह्माशंकर शास्त्री ने कहा-काली’ की व्युत्पत्ति काल अथवा समय से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ का यह रूप है जो नाश करने वाला है पर यह रूप सिर्फ उनके लिए है जो दानवीय प्रकृति के हैं, जिनमे कोई दयाभाव नहीं है। यह रूप बुराई से अच्छाई को जीत दिलवाने वाला है अतः माँ काली अच्छे मनुष्यों की शुभेच्छु और पूजनीय हैं। इनको महाकाली भी कहते हैं। सनातन हिन्दू धर्म के शाक्त सम्प्रदाय के अलावा तांत्रिक बौद्ध और अन्य सम्प्रदायों में भी काली की पूजा होती है। तांत्रिक बौद्ध धर्म में भयानक रूप वाली योगिनियों , डाकिनियों जैसे वज्रयोगिनी और क्रोधकाली की पूजा होती है। पूजा को सफल बनाने में रंजन कुमार गुप्ता व रागिणी गुप्ता, निरंजन कुमार व अनुपमा गुप्ता, विरंजन कुमार व माया गुप्ता, आकाश कुमार व सोनाली गुप्ता, सुरेश साह, हरि शंकर केशरी, जयदेव कुमार रमानी, मनीष ठाकुर, ब्रज किशोर, प्रियम शेखर, सौम्य शेखर, सागर शेखर, त्रिपुरारी सिंह, अंग्रेज दास, झलक मिश्रा, शिव शंकर, श्यामु एवं अन्य की अहम भूमिका रही।


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