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गोपालीचक में आउटसोर्सिंग के उत्खनन से केंदुआ करकेन्द में बढ़ा प्रदूषण का स्तर

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ByAdmin Office

Dec 8, 2023

केंदुआ। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड की पुटकी बलिहारी क्षेत्र अंतर्गत गोपालीचक 2नंबर एवं 17नंबर में कोयले का अंधाधुंध उत्खनन होने से केंदुआ करकेन्द व् आसपास के चारों ओर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इससे पर्यावरण को काफी खतरा हो रहा है।

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इसका पूर्ण रूप से बीसीसीएल प्रबंधन और उसके अधीन कार्य कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियां दोषी है। देश में ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए कोयला की उत्खनन जरूरी है। परंतु कोयला के उत्खनन के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने वाले सभी मापदंडों का पालन भी उतना ही जरूरी है।

 

पर लक्ष्य हासिल करने के लिए बीसीसीएल प्रबंधन व अपनी कमाई बढ़ाने के लिए गोपालीचक में संचालित आउटसोर्सिंग कंपनियां सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए उत्खनन कर रही है जो पर्यावरण के लिए घातक है। पर्यावरण प्रदूषित होने के चलते यहां के लोग कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इस दिशा में झारखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीजीएमएस, जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन को गंभीर होने की जरूरत है।

 

तभी यहां के सभी गांव प्रदूषण मुक्त होगा बीसीसीएल प्रबंधन नियमों को ताक पर रखकर आउटसोर्सिंग के माध्यम से कोयला उत्खनन करने में लगी है। कंपनी को जनता की तनिक भी चिंता नहीं है। और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अब आम लोगों को खुद आगे आना होगा और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पेड़ पौधों की रक्षा और उनकी देखभाल करने की सख्त जरूरत है। तभी हमारा गांव प्रदूषण मुक्त होगा। बीसीसीएल प्रबंधन लोगों के भविष्य के साथ साथ पर्यावरण से भी खिलवाड़ कर रही है।

 

खुली खदान के नाम पर केंदुआ करकेन्द शहरी क्षेत्र के अलावे गांवों एवं तालाबों को प्रदूषित किया जा रहा है। लोगों के खाने पीने की सामग्री एवं कपड़े भी नष्ट हो रही है। जबकि प्रदूषण को लेकर लोगों द्वारा आउटसोर्सिंग का घंटों चक्का जाम के दौरान बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा प्रदूषण रोकथाम का आश्वासन दी गई थी उसके बावजूद भी यहां प्रदूषण रोकथाम की कोई वैकल्पिक व्यवस्था अब तक नहीं दिख रही है।

 

यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में जन्म लेने वाले गांवों के बच्चे अपंगता का शिकार हो सकते हैं। जिससे यहां के शहरी एवं ग्रामीणों को बहुत बड़ा ठेस पहुंच सकता है।


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