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अंग्रेजों को टक्कर देती थी ये भारतीय कंपनी, नेहरू-बोस ने भी सराहा, अब बिकने वाली है… खरीदार विदेशी

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ByAdmin Office

Aug 10, 2023

 

*नई दिल्ली :* देश के फार्मा सेक्टर की बड़ी कंपनी सिप्ला बिकने जा रही है. इस कंपनी की खरीदने की रेस में दुनिया की सबसे बड़ी प्राइवेट इक्विटी फर्मों में से एक ब्लैकस्टोन सबसे आगे बताई जा रही है. इसे शुरू करने वाले ख्वाजा हमीद की फैमिली इसमें अपनी पूरी 33.47 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है.
*भारत में 1935 में हुई थी शुरुआत*
भारत को आजादी मिलने से पहले साल 1935 में ख्वाजा अब्दुल हमीद ने देश के लोगों को सस्ती और जीवनरक्षक दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति करने के उद्देश्य से सिप्ला की शुरुआत की थी. खास बात ये कि उन्होंने जर्मनी में अपनी केमिस्ट की नौकरी छोड़कर ऐसे समय में भारत में पहली दवा निर्माता कंपनी की नींव रखी थी, जबकि छोटी से बड़ी बीमारी तक के इलाज के लिए आने वाली दवाएं विदेशी कंपनियों से आती थीं. इसके साथ ही पश्चिमी देशों की दवा कंपनियां भारत को इतनी अहमियत भी नहीं देती थीं, जिससे कई जरूरी दवाएं जरूरतमंदों को नहीं मिल पाती थीं.
*ख्वाजा हमीद केमिस्ट से बने कारोबारी*
आंखों में एक बड़ा सपना लेकर केमिस्ट से कारोबारी बने ख्वाजा हमीद ने सिपला कंपनी की शुरुआत मुंबई से की थी. अपनी शुरुआत के बाद से ही इसने फार्मा सेक्टर में धमाल मचा दिया. 60 के दशक में कंपनी की इनकम में बड़ा उछाल आना शुरू हो गया था और 1968 में इसकी आय 1 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई. इसके बाद कंपनी ने फार्मा सेक्टर में एक के बाद एक मुकाम बनाए. 90 के दशक में 1991 तक कंपनी की बिजनेस 100 करोड़ रुपये को पार कर गया था. सबसे खास बात ये कि सिप्ला की शुरुआत से पहले भारत पश्चिमी कंपनियों पर आश्रित था, वही देश अब तक तमाम देशों को अपनी दवाइंया निर्यात करने लगा था.


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