

चौपारण (हजारीबाग)

एक तरफ़ हम डिजिटल सेवा से जुड़ने की बात कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ झारखंड राज्य से विलुप्त हो रही आदिम जनजाति बिरहोर परिवार के सैकडों लोग आज भी अंधेरे में जीवन जीने को विवश हैं, आज़ादी के साढ़े सात दशक बीत जाने के बाद भी चौपारण प्रखंड अंतर्गत चोरदाहा पंचायत स्थित सुदूरवर्ती ग्राम जमुनियातरी के बिरहोर परिवारों ने आज तक बिजली का बल्ब नहीं देखा,

यह गांव घनघोर जंगल एवम पहाड़ों से घिरा हुआ है,इस गांव में निवास करने वाली आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के सैकडों लोग आज भी कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं,
आदर्श फाउंडेशन के सचिव सुरेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने जमुनियातरी में बिजली की समस्या की ओर प्रधानमंत्री कार्यालय का ध्यान आकृष्ट करवाते हुए इस पर विशेष पहल करने का आग्रह किया है, सुरेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने बताया की सुदूरवर्ती इस गांव में बिजली न होने की वजह से बरसात एवम अन्य दिनों में ग्रामीणों को जंगली जानवरों से खतरा बना रहता है,
शाम ढलते ही समूचा गांव अंधकार में डूब जाता है, बिजली के अभाव में बच्चे रात में पढ़ाई नहीं कर पाते, मोबाइल चार्जिंग के अभाव में उपयोग नहीं हो पाता, गांव के लोग बिजली न होने की वजह से काफी हताश और परेशान हैं, बिजली इस गांव तक आ गई तो लोग डिजिटल सेवा का भी लाभ उठा पाएंगे,
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