
अंतर्कथा संवाददाता उमेश चौबे
बलियापुर : बलियापुर प्रखंड अंर्तगत छाताटांड पंचायत के कुशबेरिया गांव में दो दिवसीय करम महोत्सव का आयोजन किया गया। इसके लिए आदिवासी समाज द्वारा पश्चिम बंगाल के पुरूलिया से बुलाये गए पुजारियों द्वारा (मांझी लया) द्वारा करम डाल गाड़ा जाता है।
वहां पर रात भर घी का दिया जलाया जाता है। साथ ही साथ कम से कम सात दिन पूरे बस्ती में प्याज, लहसुन या मांसाहार भोजन नहीं किया जाता है।

पूरे शुद्धता के साथ पूजा किया जाता है। पूरे पूजा को पुरूलिया के काराम गुरु और स्थानीय नायकी बाबा के द्वारा बूढ़ा बूढ़ी थान पर पूजा अर्चना किया जाता है और गांव का शुद्धिकरण किया जाता है। इस दौरान सारिसाकुंडी के नृत्य दल द्वारा आकर्षक संथाली नृत्य प्रस्तुत किया गया।

पुरे गांव में खुशी का माहौल देखा गया। सभी बच्चे, बूढ़े, महिला, पुरुष आकर्षक पारंपरिक संथाली परिधानों में थे। इस अवसर पर प्रखंड उप प्रमुख आशा देवी ने कहा कि आदिवासी सारना धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। आदिवासी प्रकृति पूजक होते है। ये लोग पेड़, पहाड़, नदी, तालाब, पत्थर आदि की पूजा करते है। आज इनके संस्कृति को बचाने और संरक्षित करने की जरूरत है और इस तरह के संस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा ही पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित करने की जरूरत है।
मौके पर प्रखंड उप प्रमुख आशा देवी, मुखिया डोली हांसदा, हर्ल के होशियार सिंह, स्वपन कुमार महतो, अंबुज मंडल, कमेटी के दशरथ किस्कू, अजय सोरेन, राजेश हांसदा, सुनील टुडू, नंद किशोर पाल, रविश्वर मरांडी, सूरज टुडू, बलराम महतो, आजाद हांसदा, अनिल सोरेन, भीरु मुर्मू आदि उपस्थित थे।
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