
अंतर्कथा : बरही/पंचम पाण्डेय

बरही प्रखंड परिसर में स्थित विवेकानंद पुस्तकालय सह वाचनालय में सोमवार को देर शाम भारतीय शिक्षा मंडल बरही द्वारा विषय ‘ कला शिक्षा का महत्व ‘ पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता त्रिवेणी साव ने की। गोष्ठी में कला शिक्षा के महत्व को बताते हुए कहा गया कि कला की शिक्षा बालकों के शारीरिक मानसिक नैतिक मूल्यों के साथ – साथ उनके संवेगात्मक विकास में योगदान करती है। कला के द्वारा हम अपने विचारों और अनुभव को मूर्त रूप देते हैं। कला कुछ भी सीखने की परिस्थिति को प्रत्येक स्तर पर सजीव बनाती है। कला और शिल्प की शिक्षा से विद्यार्थियों के शारीरिक मानसिक और सौंदर्यात्मक व्यक्तित्व का विकास होता है। यह हमारे प्रवृत्तियों और मूल्यों के निर्माण में प्रत्यक्ष योगदान करता है। शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर कला शिक्षा के मूल्य को अनुभव किया जा सकता है। कला विद्यार्थियों की रुचियों अभिरुचियों और संवेदनशीलताओं के अनुरूप उनके व्यकित्व का विकास करने पर बल देता है। एक कला प्रेमी कलात्मक व्यवहार से परिपूर्ण होता है और प्रत्येक वस्तु स्थान परिस्थिति में अपनी विद्या का सदुपयोग करता है। वह घर सज्जा से लेकर दैनिक गतिविधियों में कला का बखूबी उपयोग करता है। वह हर पल कला के उद्देश्य सृजनात्मकता और सौंदर्यात्मक विकास के साथ साथ आध्यात्मिक बल पर जोर देता है।

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