
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। मोक्षदा एकादशी का शाब्दिक अर्थ है मोक्ष प्रदान करने वाली। यह एकादशी भगवान कृष्ण को समर्पित है।
पुराणों के अनुसार इसी एकादशी पर भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि पर अर्जुन को भगवत गीता का ज्ञान दिया था और उन्हें मोह के सभी बंधनों से मुक्त किया था, यही कारण है कि इस एकादशी पर व्रत करने से व्यक्ति को सभी मोह-बंधनों से मुक्ति मिलती है।

*शुभ मुहूर्त:*

*मोक्षदा एकादशी -” 03 दिसम्बर, शनिवार*
*मोक्षदा एकादशी प्रारम्भ -* 03 दिसम्बर, शनिवार को 05:39 AM से
*मोक्षदा एकादशी समाप्त -* 04 दिसम्बर, रविवार को 05:34 AM तक
*हरि वासर समाप्त होने का समय :* 4 दिसंबर 11:40 AM तक
*पारण का समय -* 04 दिसम्बर रविवार 01:14 PM से 03:19 PM तक
मोक्षदा एकादशी के शुभ दिन पर भगवान श्रीकृष्ण, महर्षि वेद व्यास और श्रीमद् भगवत गीता की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस दिन व्रत करके अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण किया जाता है।
मान्यता है कि हरि वासर की अवधि में एकादशी व्रत का पारण वर्जित होता है। इसीलिए पारण के मुहूर्त में ही कुछ सात्विक भोजन करके इस व्रत को पूर्ण करें।
तो यह थी मोक्षदा एकादशी की अवधि और पारण के मुहूर्त की जानकारी। इस समय के अनुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से जहाँ एक ओर आपको सभी तरह के मोह से मुक्ति मिलेगी, वहीं आपके पितरों को भी इस व्रत का लाभ प्राप्त होगा, और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी। तो इस मोक्षदा एकादशी का व्रत अवश्य करें जिससे भगवान श्री कृष्ण आपके साथ ही आपके पूर्वजों का भी उद्धार करें।
साथ ही यह दिन भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिए भी विशेष है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को सच्चे मन से चढ़ावा अर्पित करने से उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, श्री मंदिर के माध्यम से हम आपके लिए चढ़ावा सेवा लेकर आए हैं, जिससे आप घर बैठे अपने और अपने परिवार के नाम से वृंदावन में श्री बांके बिहारी मंदिर और गोवर्धन के गिरिराज मुखारविंद मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण को चढ़ावा अर्पित कर सकते हैं।
*मोक्षदा एकादशी के पावन दिन पर आप हमारी इस सेवा का लाभ अवश्य उठाएं और चढ़ावे के रूप में चुनरी, भोग, दूध, पुष्प आदि समर्पित कर अपने परिवार के लिए प्रभु की कृपा प्राप्त करें।*
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