
लेखक:- डॉ दिलीप गिरी (आयुर्वेद विशेषज्ञ )

लौंग का गुण : ऐसे तो रसोई घर में इसका उपयोग गरम मसाले मैं किया जाता है पान में या स्वागत सत्कार में शॉप सुपारी के साथ इसे प्रस्तुत किया जाता है घरेलू इलाज में कुछ लोगों के लिए इसका उपयोग लाभप्रद होता है दर्द में इसके तेल की पूरे री दांत के गोचर में रखने से दांत का दर्द मिटता है .

लॉन्ग मुंह पर रखकर चूसने से दांत मसूड़ों एवं गले के दर्द में आराम होता है इसे पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से माथा दर्द मैं आराम मिलती है .
लॉन्ग को मुंह में रखकर चूसने से जी मिचलाना बंद हो जाता है पेट का अफरा मिटता है, प्यास मिटती है ,उल्टियां बंद होती है, लॉन्ग को बुनकर मुंह में रख कर चूसने से या शहद में मिलाकर चाटने से खांसी में आराम मिलती है, इसे अनार के छिलकों के साथ समान मात्रा में मिलाकर शहद के साथ चाटने से खांसी सर्दी में भी आराम मिलता है।
इसे पानी में पीसकर लगाने से आंखों की पलकों पर होने वाली फुंसी बैठ जाती है इसे मुंह में रखकर चूसने से मुख और सांस की दुर्गंध मिटती है भोजन के बाद लॉन्ग चूसने से पाचन मिटती है तथा कब्ज नहीं होता है पेट की जलन दूर होती है लोंग के वृक्ष में जो कलियां लगती है वह सूखकर संकुचित हो जाता है यह दक्षिण भारत के तटीय भाग में ज्यादा पाई जाती है यह कड़वी हल्की नेत्रों को हितकारी शीतल पाचन रुचिकारी रक्त विकार प्यास उल्टी हिचकी तथा दर्द को शीघ्र नष्ट करती है मैं समझता हूं कीलॉन्ग से सभी परिचित हैं
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