
(1)जिस व्यक्ति की नौकरी किसी बंधन के परिणामस्वरूप नहीं लग पा रही हो, उसे निम्न 7 वृक्षों की मूलों को एकत्रित करना चाहिये। इनकी मात्रा कम-ज्यादा कितनी भी हो सकती है। इन सभी पौधों की मूलों (जड़ों) को एक साथ किसी नायलोन की महीन जालीदार थैली में रख लें। इस थैली को बाथरूम में किसी खूटी अथवा कील पर लटका दें। रोजाना जब स्नान करने जायें, तब इस पोटली को स्नान के जल में 5 मिनट तक पड़ा रहने दें। इसके पश्चात् दूसरे दिन के उपयोग हेतु पुनः सुरक्षित टांग दें तथा इस जल से स्नान कर लें। इस प्रकार से सप्तमूल स्नान 40 दिन तक करने से बंधन समाप्त होता है तथा सम्बन्धित व्यक्ति को सुपरिणाम परिलक्षित होने लगते हैं। जिन सात पौधों की जड़ें लेनी हैं, वे निम्न हैं, इन जड़ों को शुभ मुहूर्त में निकालें तो और भी उत्तम होगा:
(1) अपामार्ग या ओंगा या आंधीझाड़ा,
(2) चंदन,
(3) मौलश्री,
(4) अशोक,
(5) वट की वायुवीय जड़,
(6) पीपल की जटा तथा
(7) गुलतुर्रा ।

(2) बंधी हुई दुकान का बंधन खोलने हेतु रोजाना जब दुकान खोलें तो एक प्लेट में थोड़ा सा कपूर लेकर दुकान के भीतर कहीं भी जलायें। जब कपूर जले तब उसी के पास बैठकर उसके धूम्र से एक पीले नींबू को धूपित करें इस नींबू को पहले से ही साथ ले जायें। इसे धूपित करते समय यह प्रार्थना करें कि इस दुकान में जो कोई भी बंधन हो, वह इस धूम्र के साथ उड़ जाये अथवा इस नींबू में प्रवेश करे। इसके पश्चात् जब कपूर पूरा जल जाये, तब उस नींबू को दुकान की दहलीज पर लाकर हाथ की चोट से फोड़ दें। इसे फोड़ते समय फोड़ने वाले का मुख बाहर की ओर हो। जब नींबू फूट जाये तब इसे बाहर की ओर सुविधाजनक दिशा में फेंक दें। इस प्रयोग को कुछ दिनों तक करने से बंधन से दुकान मुक्त हो जाती है।

(3)बंधी हुई दुकान खोलने हेतु अग्रांकित लिखी हुई वस्तुओं को एकत्रित कर लें। इन वस्तुओं को किसी कोरे वस्त्र में सुरक्षित बांधकर उस पोटली को पुन: एक लाल वस्त्र में सप्तरंगी नाले की सहायता से बांधकर दुकान के द्वार के मध्य में अंदर की तरफ ‘फिंका दें। इसके प्रभाव से दुकान का बंधन खुल जाता है। ध्यान रहे कि इस लटकाई गई पोटली को रोजाना 2 अगरबत्तियों का धूम्र अवश्य दिखाएं। पोटली में बांधे जाने
वाले पदार्थ निम्नानुसार हैं:
1. बिछुआ नामक पौधे की जड़ का एक टुकड़ा।
2. बिछुआ नामक पौधे का बीज। यह बीज इसके फल के भीतर पक्षी की खोपड़ी के समान होता है।
3. कोई भी तीन नदियों की मिट्टी की थोड़ी-थोड़ी मात्रा में।
4. बरगद की जटा का एक टुकड़ा। यह टुकड़ा उस जटा का हो जो भूमि का स्पर्श कर रही हो, किन्तु वह जमीन में धंसी हुई न हो।
5. एक टुकड़ा बिल्व की जड़ का। यह वह वृक्ष है जिसके पत्ते शिवजी को अर्पित किये जाते हैं।
6. लाल सूखी हुई मिर्च के कुछ बीज।
7.तीनों प्रकार की गुंजा (लाल, सफेद, काली) के दो-दो बीज।
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विशेष-प्रदत्त जानकारी व परामर्श शास्त्र सम्मत् दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति मात्र है किसी भी प्रकार का कोई भी प्रयोग किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही करें…
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