
उमेश कुमार गिरि:

हिंदी दिवस पर मातृभाषा हिंदी को मेरा कोटि-कोटि नमन आप सभी भारत वासियों को हिंदी दिवस पर मातृभाषा हिंदी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं
तुलसी, कबीर, मीरा, जायसी की तान हिंदी हमारी लेखनी और भावना का गान राष्ट्रभाषा मातृभाषा अस्मिता का सम्मान यह हिंदी से स्वाभिमान है।

हिंदी ही पहचान है हिंदी ही हम सब का स्वर है शब्द शब्द अलंकार से सुशोभित है हिंदी ही हम सबका शान है जिसके शब्द शब्द से मातृभूमि मातृभाषा राष्ट्रभाषा राष्ट्रीय की यह गौरव गान है अपनी मातृभाषा हिंदी पर गर्व है हिंदी ही पूरे भारतवासी की पहचान है
*हिंदी दिवस (१४) सितंबर*
” व्यथा हिंदी की “”
हिंदी हूँ. भारत के मस्तक के बिंदी और तिलक हुँ।
व्यथा है मेरी हर वर्ष जागृति नाम से मेरे अस्तित्व कोई जगाया जाता है कई प्रांतों मे स्वेच्छा से अपना कर मुझे थोपा हुआ सा समझा जाता है क्योंकि किसी देश में उसी के अस्तित्व को स्मरण कराया जाता है हिंदी राष्ट्र और राजभाषा हो जिसकी वही हर वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है।
*जब अंग्रेज थे भारतवासियों में स्वाभिमान थी*
हिंदी… हिंदू… हिंदुस्तान.. हिंदी है हम वतन के हिंदुस्तान हमारा
हिंदुस्तान का पर्याय समृद्ध भारत का अभिमान थी
आज जब देश आजाद है तो हर जगह अंग्रेजी की खान है
दो पंक्ति हिंदी के साथ…. चार पंथी अंग्रेजी सब की शान है
माता , पिता … भाई बहन की जगह की जगह… मम्मी पापा… मॉम डैड… अंकल आंटी, और सिस बन गए है… गुरुजी का स्थान… सर मैडम ने ले लिया
तो कहीं … मैम, मिस बन गए हैं
हिंदी दिवस: बदल रही है संस्कृति बदल रहा है आचरण हमारा।
हर इंसान क्यों, अंग्रेजी के पीछे भाग रहा है।
माना कि अंग्रेजी पढ़ना हमारी मजबूरी है लेकिन हिंदी को मिले सम्मान जरूरी है।
आओ हम गर्व से बोले हिंदी भाषा हमारी है यह देश की शान और पहचान हमारी है
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