
ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद एक युग समाप्त हो गया।इसके साथ हीं ब्रिटेन सहित 14 ऐसे देश हैं जो महारानी को अपना स्टेट ऑफ हेड मान रहा था ऐसे हालत में वहां भी कई बदलाव किये जा सकते हैं। कई शाही प्रतीक बदले जा सकते हैं। फ्लैग, नोट, सिक्के में अभी तक महारानी की अलग-अलग तस्वीर लगी होती थी। अब इसे हटाकर नए किंग बने प्रिंस चार्ल्स की फोटो लगाए जाने की उम्मीद है।

गुरुवार को 96 साल की उम्र में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का निधन हो गया। वे सबसे लंबे समय तक (70 साल) ब्रिटेन की क्वीन रहीं।

*शाही प्रतीक को बदलने में लग सकता है कुछ समय*
ब्रिटिश राजशाही के महत्व को स्थापित करने और उन्हें सम्मान देने के लिए कई सिंबल हैं,जिसे रोजमर्रा जिंदगी में इस्तेमाल किए जाते हैं। जिसमें नोट, सिक्के, आभूषण, टिकट सहित कई चीजें आती हैं। अब इन शाही प्रतीकों से रानी का नाम और चेहरा हटाने में काफी समय लग सकता है। हालांकि प्रिंस चार्ल्स चाहें तो कई रॉयल सिंबल को पहले की तरह ही चलने दे सकते हैं। अगर शाही प्रतीकों के बदलाव का डिसीजन लिया जाता है तो सभी बदलावों को पूरा करने में कम से कम 2 साल का समय लग सकता है।
इसी तरह देश में 4.5 अरब बैंक नोट ऐसे हैं, जिन पर रानी का चेहरा है। इनमें अब नए सम्राट की तस्वीर लगाई जा सकती है। 1952 में जब महारानी सिंहासन में बैठी थीं, तब सिक्कों या नोटों पर उनकी तस्वीर नहीं थी। 1960 में पहली बार डिजाइनर रॉबर्ट ऑस्टिन ने नोटों में एलिजाबेथ द्वितीय का चेहरा लगाया था। इसके बाद कई लोगों ने महारानी का चेहरा लगाए जाने की आलोचना भी की थी। महारानी एलिजाबेथ II का सिक्का ब्रिटेन के पाउंड के अलावा 10 और देशों में चलता है। कनाडा में कई ऐसे नोट आज भी चलते हैं, जिनमे महारानी की फोटो है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजियन सहित कई देशों के कुछ नोटों में महारानी का चेहरा इस्तेमाल किया जाता है। धीरे-धीरे इन देशों के नोटों में भी बदलाव हो सकता है।
*राष्ट्रगान में महारानी की लंबी उम्र की कामना की गई,इसे भी अब बदल कर प्रिंस के नामो का होगा जिक्र*
किसी भी देश के राष्ट्रगान यानी नेशनल सॉन्ग में उस देश की विशेषताओं की बात कही जाती है। ब्रिटेन के राष्ट्रगान में महारानी का जिक्र किया गया है और उनके लंबी उम्र की कामना की गई है। राष्ट्रगान में लिखा गया है कि ‘गॉड सेव अवर गॉर्जियस क्वीन’ यानी भगवान हमारी दयालु रानी की रक्षा करें…
अब महारानी के न रह जाने के बाद इसे भी चेंज किया जा सकता है। राष्ट्रगान में बदलाव करके ‘गॉड सेव अवर गॉर्जियस किंग’ यानी भगवान हमारे महान राजा को बचाओ…किए जाने की संभावना है।
*चर्च की किताबों में है महारानी के लिए प्रार्थनाएं*
चर्च ऑफ इंग्लैंड की सुप्रीम गवर्नर महारानी थीं। चर्च में होने वाली कॉमन प्रेयर की किताब में महारानी के लिए कई प्रार्थनाएं हैं। ये प्रार्थनाएं 1662 में पहली बार लिखी गई थीं। तभी से चर्च की सामान्य प्रेयर में देश के सम्राट/महारानी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रेयर की जाती है। अब महारानी के निधन के बाद प्रिंस चार्ल्स के लिए प्रार्थना की जाएगी। इसीलिए चर्च की किताबों में संशोधन किए जाने की उम्मीद है।
*संसद की शपथ में भी होगा बदलाव*
1952 से ही सभी सांसद अपनी शपथ में महारानी एलिजाबेथ का जिक्र करते आए हैं। सांसद शपथ लेते हैं कि महारानी एलिजाबेथ और उनके उत्तराधिकारियों के प्रति ईमानदार रहेंगे, लेकिन अब महारानी के निधन के बाद इस शपथ में भी बदलाव किया जा सकता है।
*शाही हथियार रहेगी यथावत*
ब्रिटेन के सरकारी बिल्डिंग्स में बड़े पैमाने पर शाही हथियार लगाए जाते हैं। इसके अलावा वहां के न्यायाधीश, सरकारी अफसर इसे लेकर भी चलते हैं। हालांकि शाही हथियार में महारानी की तस्वीर या नाम कहीं भी नहीं है, बल्कि एक ढाल के अगल-बगल शेर और यूनिकॉर्न को दिखाया गया है। इसीलिए माना जा रहा है कि इसमें बदलाव जरूरी नहीं है।
*फ्लैग्स में होगा बदलाव*
ब्रिटेन में पुलिस स्टेशनों के बाहर लगने वाले झंडे से लेकर नौसेना के जहाज में इस्तेमाल किए जाने वाले फ्लैग में बदलाव किया जा सकता है।
एलिजाबेथ द्वितीय के कई झंडे का उपयोग उन देशों में किया जाता है जहां वह राज्य की प्रमुख हैं। ऐसे में उनके निधन के बाद उन सभी फ्लैग्स में बदलाव किए जा सकते हैं, जो विशेष तौर पर केवल महारानी के मौजूदगी में ही इस्तेमाल किए जाते थे।
*14 देशों के संविधान में भी हो सकता है संधोधन*
बारबुडा, बहामास, ग्रेनाडा, सेंट लूसिया जैसे 14 देश महारानी एलिजाबेथ को अपना हेड ऑफ स्टेट मानते हैं। इन देशों के संविधान में महारानी को विशेष रूप से राज्य की मुखिया बताया गया है। ऐसे में महारानी के निधन के बाद इन सभी देशों के संविधान में भी संधोधन किए जा सकते हैं।
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