
आदित्यपुर। बिहार के पटना जिले स्थित अपने पैतृक गांव लई में सामाजिक एकजुटता और सामुदायिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। पुरेंद्र नारायण सिंह ने ग्रामवासियों के सहयोग से करीब 30 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित कुशवाहा पंचायत परिषद भवन का विधिवत उद्घाटन किया।
इस भवन के निर्माण को ग्रामीणों ने सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए पुरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि कुशवाहा समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है।
सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, महात्मा गौतम बुद्ध, माता सावित्रीबाई फुले और शहीद जगदेव प्रसाद जैसी महान विभूतियों के विचार समाज को सदैव प्रेरित करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के आदर्शों को केवल याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलकर समानता, शिक्षा, सामाजिक न्याय और मानवता को अपने जीवन में अपनाना जरूरी है।
उन्होंने विशेष रूप से शहीद जगदेव प्रसाद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका संघर्ष सामाजिक गैरबराबरी समाप्त करने और शोषित-वंचित वर्गों को अधिकार एवं सम्मान दिलाने के लिए था। उनके सपनों का समाज तैयार करने के लिए शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कुशवाहा समाज से व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी निभाने तथा पिछड़े, दलित, कमजोर और वंचित वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। पुरेंद्र सिंह ने नवनिर्मित भवन को समाज के लोगों के बीच आपसी संवाद, शैक्षणिक गतिविधियों, सामाजिक विमर्श और रचनात्मक कार्यक्रमों का केंद्र बनाने की अपील की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री जयंत राज कुशवाहा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुशवाहा, मुखिया अजीत कुशवाहा, उमेश कुमार कुशवाहा, विभूति कुमार, प्रोफेसर सुशीला देवी और पंचायत समिति सदस्य नीरज कुमार उपस्थित थे। इससे पूर्व सुबह 11 बजे नवनिर्मित भवन में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई।
पूजा के बाद उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। समारोह में कुशवाहा कल्याण परिषद भवन कमेटी के अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष श्याम बाबू सिंह, सचिव नीतीश कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष जयशंकर सिंह, उप कोषाध्यक्ष विश्वजीत कुमार सिंह सहित शेखर कुमार कुशवाहा, शिव शंकर, धीरज कुमार, अभिषेक कुमार, महाशंकर सिंह समेत शिवदयाल सिंह, राधे कृष्णा सिंह, सुबोध कुमार सिंह, सुमन कुमार सिंह, आनंद कुमार सिंह, दिनेश कुमार सिंह और शिवकुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं गणमान्य लोग मौजूद थे।
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