
सरायकेला के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सावन पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पर्व को लेकर बाजारों में राखियों की दुकानें सज गई हैं और खरीद-बिक्री जोरों पर है। रंग-बिरंगी राखियों से बाजार गुलजार नजर आ रहे हैं।
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, वहीं भाई बहनों की रक्षा का वचन देते हुए उन्हें उपहार भेंट करते हैं। पर्व को लेकर बहनों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
पंडित अंबुज पाठक ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने के साथ देवी-देवताओं को भी राखी अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है तथा घर में सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण रहता है।
उन्होंने बताया कि बहनों को भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले अपनी कुलदेवी-कुलदेवता को राखी अर्पित करनी चाहिए, क्योंकि मान्यता के अनुसार कुलदेवी-देवता पूरे परिवार की रक्षा करते हैं और बुरी नजर से बचाते हैं। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को भी राखी अर्पित करने की परंपरा है।
मान्यता है कि इससे परिवार संकटों से सुरक्षित रहता है तथा रिश्तों में मिठास और आपसी तालमेल बना रहता है।
पर्व को लेकर सरायकेला के बाजारों में काफी चहल-पहल है। बहनें भाइयों के लिए राखियों के साथ-साथ उपहारों की खरीदारी भी कर रही हैं। दुकानदारों को रक्षाबंधन पर अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
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