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एसटीजी आउटसोर्सिंग कंपनी में ग्रामीण रैयतों को नियोजन,मुआवजा नहीं मिला तो होगा आंदोलन। रैयत

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Aug 5, 2026
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रिपोर्ट,अरुण कुमार सैनी

केंदुआ। धनबाद नगर निगम के वार्ड संख्या-13 अंतर्गत संचालित गोंदूडीह कोलियरी में एसटीजी आउटसोर्सिंग परियोजना के विरोध में मंगलवार को बसेरिया बस्ती स्थित काली मंदिर प्रांगण में ग्रामीण रैयतों की एक आहूर्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल एवं वायु प्रदूषण, रैयतों को सरकारी नियमानुसार सुविधाएं नहीं मिलने, विस्थापन, मुआवजा तथा स्थानीय युवाओं को 75% रोजगार देने की मांग पर प्रमुखता से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता दीपक तिवारी तथा संचालन अरुण दास ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में वार्ड-13 की पार्षद करमी देवी उपस्थित रहीं। बैठक में गोधर, खरीकाबाद, छोटा खरीकाबाद, बसेरिया, बसेरिया तिवारी बस्ती, पोद्दार बस्ती, दास बस्ती एवं गोंदूडीह के ग्रामीणों ने भारी संख्यां में भाग लिया। वहीं ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय रैयतों की जमीन पर बिना उचित मुआवजा दिए आउटसोर्सिंग कार्य शुरू कर दिया है। साथ ही सरकार के प्रावधान के अनुसार 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं दिए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। वहीं समाज सेवी टुनटुन यादव ने कहा कि बीसीसीएल प्रबंधन का कहना है कि 2 अगस्त के पहले रैयतों और विस्थापितों को उचित मुआवजा उनके खाते में भेजा है तभी काम चालू किया गया है। पूछना चाहता हूं कि आज यहां रैयत जो भी बैठे सभी का कहना है कि कुछ नहीं मिला है । मैं पूछना चाहता हूं कि किस रैयत के खाते में पैसा मिला है । आज ऊपर से सारे रैयतों का कहना है कि मुआवजा नहीं मिला है। रैयत और विस्थापित के नाम पर रैयत को मंगनी में बेच डाला आउटसोर्सिंग कंपनी के संचालन कर्ता को । उन्होंने कहा कि यदि बाहरी लोगों के बल पर कार्य कराने की कोशिश की गई तो ग्रामीण इसका जमकर विरोध करेंगे।उन्होंने कहा कि गुंडा तो छोड़िए अगर प्रशासन भी यहां गुंडा बनकर आ जाता है तो उससे मैं लड़ने को तैयार हूं । और मैं यहां के रैयतों को उचित हक और अधिकार दिलाने का कार्य करूंगा। वहीं

वार्ड पार्षद करमी देवी ने कहा कि क्षेत्र के लोग धूल और प्रदूषण झेलें तथा रोजगार बाहरी लोगों को मिले, यह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कंपनी पहले मुआवजा, विस्थापन और स्थानीय रोजगार के मुद्दे का समाधान करे, अन्यथा ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बैठक में रैयत ग्रामीणों ने चेतावनी दी है

कि जब तक जमीन के बदले उचित मुआवजा और स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिया जाता है, तब तक क्षेत्र में आउटसोर्सिंग का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। इस दौरान “जमीन हमारी है, मनमानी नहीं चलेगी” जैसे नारों के साथ रैयतों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन तेज करने का संकल्प लिया।वहीं गोंदूडीह के रैयत एवं इंटक नेता रमेश रवानी ने बताया कि मैं भी यहां का रैयत हुं । बीसीसीएल का यह रवैया पुराना है बीसीसीएल सिर्फ रैयत का जमीन लेना जानती हैं । उसके बदले रैयत को ना रोजगार ना मुआवजा देना जानती हैं ।आज भी बीसीसीएल ने जमीन के बदले मुआवजा देने का कार्य नहीं किया है जो न्याय संगत नहीं है। अतः मैं तमाम ग्रामीणों से आग्रह करूंगा कि एकताबध होकर हमें लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है तभी हमारा हक और अधिकार मिलेगा ।

उन्होंने सभी ग्रामीणों से जमीन के कागजात को अप टू डेट कराने का आग्रह किया। एवं लोगों से आग्रह किया के 75% रोजगार के लिए सर्वप्रथम धनबाद में नियोजनालय में नियोजन हेतु कार्ड बनाने की सख्त जरूरत है। उन्होंने बताया कि हम लोग पार्षद महोदया से त्रिपक्षीय वार्ता कर रैयत्तों की समस्या का निदान कराने का प्रयास करेंगे । त्रिपक्षीय वार्ता में बीसीसीएल प्रबंधन जिला प्रशासन एवं रैयत होंगे। त्रिपक्षीय वार्ता से ही रैयत को अपना हक मिलने की संभावना है।

वहीं समाजसेवी एवं खरिकाबाद के रैयत राजू रवानी ने बताया कि इसके पहले भी ग्रामीणों ने बैठक कर रैयत विस्थापित कमेटी का चुनाव किया गया था जो फर्जी लोगों का कमेटी बन चुका है

जिसकी सूचना बीसीसीएल प्रबंधन को ग्रामीणों की ओर से देना जरूरी है। क्योंकि जो कभी जो भी कमेटी पहले बनी है वह आमसभा के माध्यम से नहीं बना है। मैं बीसीसीएल प्रबंधन एवं आउटसोर्सिंग के प्रबंधन को सूचित करना चाहता हूं की अगर आप सोच रहे हैं कि गुंडा और बंदूक के नोक पर आउटसोर्सिंग चलाएंगे तो यह आपकी भूल है। यहां के रैयत अपने हक और अधिकार के लिए कुछ भी करने को हर क्षण तैयार हैं।

बैठक में श्याम प्रसाद, ब्रह्मदेव यादव, राजू रवानी, सुनील रवानी, महेश रवानी, मथन रवानी, जोगेंद्र यादव, अशोक यादव, मुन्ना खान, नरेश रजक, रमेश कुमार रवानी, बम-बम यादव, चंदन पोद्दार, भुनेश रवानी, अमित दास, मंटू दास, मदन यादव, संतोष चौहान, मोनू कुमार, आनंद दास, उमेश दास, रवि दास सहित सैकड़ों रैयत एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।


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