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ईचागढ़ में हाथियों का तांडव: दर्जनों घर तोड़े, अनाज चट, ग्रामीण दहशत में

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Jun 29, 2026
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सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा। कुंजवन, रुगड़ी, कालीचामदा, मैंसाड़ा समेत दर्जनों गांवों में हाथियों के झुंड ने कई घरों को तोड़ दिया और घरों में रखे अनाज को चट कर गए।

ग्रामीणों के अनुसार दलमा सेंचुरी से पलायन कर हाथियों का झुंड ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में डेरा डाले हुए है। यहां भोजन-पानी की पर्याप्त उपलब्धता के कारण अब पश्चिम बंगाल और बुंडू-तमाड़ क्षेत्र से भी हाथी पहुंच रहे हैं।

प्रभावित ग्रामीणों में तनु लायक, शिवराम घाटवाल, अजय लायक, चित्तरंजन पुरान समेत कई परिवार शामिल हैं, जिनके घरों को हाथियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है।

“रात को हाथी आ गए। घर की दीवार तोड़ दी। धान-चावल सब खा गए। हम लोग जान बचाकर भागे। अब कहां रहेंगे, क्या खाएंगे? वन विभाग भगाता है तो चले जाते हैं, पर कुछ घंटे बाद फिर लौट आते हैं।”

चांडिल वन क्षेत्र की एलिफेंट ड्राइव टीम लगातार हाथियों को भगाने का प्रयास कर रही है, लेकिन हाथी कुछ घंटों बाद ही कालीचामदा और मैंसाड़ा गांव में वापस लौट आते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल में पर्याप्त भोजन नहीं मिलने और हाथियों के आवासीय क्षेत्र में धड़ल्ले से बालू खनन व भंडारण के कारण मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है।

“एक तरफ भीषण गर्मी, शाम होते ही बारिश। ऊपर से बिजली नहीं रहती। अंधेरे में घर से आंगन निकलना भी मुश्किल है। रातभर जागकर परिवार की रखवाली करते हैं। खेती-बाड़ी सब चौपट हो गई है।”

ग्रामीणों का कहना है कि दिन में खेत और रात में घर सुरक्षित नहीं है। शाम ढलते ही किसान घरों से बाहर निकलने से डरते हैं। बिजली नहीं रहने से अंधेरे में हाथियों का खतरा और बढ़ जाता है।

ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से स्थायी समाधान, फसल-घर क्षति का मुआवजा और रात में गश्ती बढ़ाने की मांग की है।

दलमा के हाथियों का कॉरिडोर ईचागढ़-चांडिल क्षेत्र बन चुका है। जंगल में भोजन की कमी और अवैध खनन के कारण हाथी गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मानव-हाथी संघर्ष और बढ़ सकता है।


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