
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कर्मचारियों के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी से लंबे समय तक निरंतर कार्य लिया जाता है,
तो उसे ‘वैकल्पिक’ या ‘अस्थायी’ मानकर अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि 12-13 साल की लंबी सेवा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि उस पद पर नियमित नियुक्ति की आवश्यकता थी।


यह मामला कानपुर नगर निगम के स्विचमैन कर्मचारियों से जुड़ा है, जो वर्ष 1993 से 2006 तक लगातार कार्यरत थे।
शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पिछले फैसले को रद्द करते हुए प्रभावित कर्मचारियों को तुरंत वापस नौकरी पर रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि इतने वर्षों तक निरंतर कार्य करने वाले व्यक्ति को अस्थायी कहना गलत है।
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