
सरायकेला: जिला के महत्वपूर्ण चांडिल–कांड्रा मुख्य सड़क की बदहाली और अधूरे निर्माण कार्य ने स्थानीय ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। काटिया, चैनपुर, पाटा, छोटालाखा, मानीकुई और तारकुआं के सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क की जर्जर स्थिति के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रशासन को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।

धूल और दुर्घटनाओं से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क पर उड़ती धूल और गहरे गड्ढों के कारण आवागमन बेहद जोखिम भरा हो गया है। सड़क की खस्ताहाली की वजह से अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, फिर भी विभाग मौन है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए कहा कि जहाँ मरम्मत की सख्त जरूरत थी वहाँ काम नहीं किया गया और केवल दिखावटी कार्य कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है।
7 दिन में काम शुरू करने का आश्वासन
ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता अशोक रजक और सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। वार्ता के दौरान कार्यपालक अभियंता ने स्वीकार किया कि पूर्व टेंडर की राशि समाप्त हो चुकी है, इसलिए संशोधित एस्टिमेट बनाकर शेष कार्य पूरा किया जाएगा। उन्होंने 7 दिनों के भीतर काम दोबारा शुरू करने और तब तक नियमित जल छिड़काव का भरोसा दिया है।
प्रमुख मांगें और चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। उनकी प्रमुख मांगों में स्पीड ब्रेकर लगाना, घनी आबादी में गति सीमा तय करना, निर्माण पूरा होने तक भारी वाहनों पर रोक और चैनपुर नहर पुल पर सुरक्षा रेलिंग के साथ फुटपाथ बनाना शामिल है।
इस मौके पर ईचागढ़ के पूर्व प्रत्याशी आसुदेव महतो, विस्थापित अधिकार मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो और रुदिया पंचायत के मुखिया ज्योति महाली समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
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