
धनबाद: कोयलांचल के हृदय स्थली कहे जाने वाले झरिया में पिछले काफी समय से जारी दूषित पानी की आपूर्ति ने अब एक गंभीर संकट का रूप ले लिया है। इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर स्थानीय जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठन ‘परेशान झरिया’ की टीम ने सोमवार को धनबाद के महापौर संजीव सिंह से उनके कार्यालय में मुलाकात की।

टीम ने महापौर को एक ज्ञापन सौंपते हुए झरिया की जनता को हो रही नारकीय स्थिति से अवगत कराया और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

गंदे पानी से बीमारियों का बढ़ा खतरा
मुलाकात के दौरान ‘परेशान झरिया’ टीम के सदस्यों ने बताया कि झरिया के विभिन्न वार्डों और मुहल्लों में पिछले कई दिनों से नलों के माध्यम से जो पानी पहुंच रहा है, वह न केवल गंदा है बल्कि उसमें से दुर्गंध भी आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी का रंग काला और मटमैला है, जिसे पीना तो दूर, रोजमर्रा के अन्य कार्यों में इस्तेमाल करना भी मुमकिन नहीं है।
इस दूषित जलापूर्ति के कारण क्षेत्र में डायरिया, टाइफाइड और त्वचा संबंधी रोगों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। टीम ने चिंता व्यक्त की कि यदि जल्द ही पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो झरिया में कोई महामारी फैल सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
महापौर का कड़ा रुख और तत्काल निर्देश
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महापौर संजीव सिंह ने स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर मौजूद टीम के सदस्यों के सामने ही झारखंड मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (झमाडा) के उच्च अधिकारियों को फोन लगाया। महापौर ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर किन कारणों से जनता को जहरीला पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
संजीव सिंह ने झमाडा के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि:
जलापूर्ति की पाइपलाइनों की तुरंत जांच की जाए ताकि कहीं भी लीकेज या सीवरेज मिक्सिंग की समस्या को दूर किया जा सके।
जल शोधन संयंत्रों (Water Treatment Plants) की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए और क्लोरिनेशन की प्रक्रिया को मानक के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।
उन क्षेत्रों की पहचान कर तत्काल समाधान निकाला जाए जहाँ से सबसे अधिक शिकायतें आ रही हैं।
महापौर ने टीम को आश्वस्त करते हुए कहा, “झरिया की जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।”
‘परेशान झरिया’ का संकल्प
मुलाकात के बाद ‘परेशान झरिया’ के प्रतिनिधियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन झमाडा की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि महापौर के हस्तक्षेप से एक नई उम्मीद जगी है। हालांकि, टीम ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि अगले कुछ दिनों में धरातल पर सुधार नजर नहीं आया, तो वे जनता को साथ लेकर उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
फिलहाल, महापौर के सख्त निर्देशों के बाद झरिया की जनता की नजरें झमाडा की कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन कागजी निर्देशों से निकलकर कब तक झरिया के नलों में शुद्ध जल पहुँचा पाता है।
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