
बिहार विधानसभा सचिवालय ने विधायी कार्यों में पारदर्शिता और गति लाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राज्य के विधायक शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों की सूचना ऑफलाइन नहीं देंगे। इसके बजाय, अब यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जिसे NEVA (National e-Vidhan Application) पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

डिजिटल युग की ओर एक बड़ा बदलाव

यह नई व्यवस्था 23 फरवरी 2026 से अनिवार्य रूप से लागू कर दी जाएगी। सचिवालय के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य कागज रहित (Paperless) कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना और विधायी कार्यों को आधुनिक बनाना है। अभी तक विधायकों को अपने क्षेत्र की समस्याओं या महत्वपूर्ण मुद्दों को शून्यकाल में उठाने के लिए भौतिक रूप से सूचना पत्र जमा करने पड़ते थे, लेकिन अब वे अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके सीधे पोर्टल पर अपनी बात रख सकेंगे।
इस फैसले के मुख्य बिंदु:
अनिवार्यता: 23 फरवरी 2026 के बाद से कोई भी ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
NEVA पोर्टल का उपयोग: सभी विधायकों को नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन के जरिए ही सूचनाएं देनी होंगी।
समय की बचत और पारदर्शिता:
ऑनलाइन सिस्टम से डेटा का प्रबंधन आसान होगा और सूचनाओं की ट्रैकिंग सटीक होगी।
पर्यावरण के अनुकूल: कागज के उपयोग में कमी आने से यह ‘ग्रीन गवर्नेंस’ की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
बिहार विधानसभा देश की उन चुनिंदा विधानसभाओं में शामिल है जो तकनीक को तेजी से अपना रही हैं। इस कदम से न केवल सचिवालय के कामकाज का बोझ कम होगा, बल्कि विधायकों के लिए भी सूचना देना और उसके स्टेटस की निगरानी करना आसान हो जाएगा। यह सुधार डिजिटल इंडिया के संकल्प को राज्य स्तर पर मजबूती प्रदान करता है।
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