
बोकारो थर्मल
डीवीसी बोकारो ताप विद्युत केंद्र के तकनीकी भवन स्थित सम्मेलन कक्ष में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी परिचर्चा एवं वृत्त-चित्र प्रदर्शन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके पश्चात मुख्य महाप्रबंधक एवं परियोजना प्रधान सुशील कुमार अरजरिया, उप महाप्रबंधक शिव प्रसाद महापात्र, वरिष्ठ प्रबंधक वित्त सुशील कुमार, प्रबंधक मानव संसाधन डॉ.संज्ञा दास, राजभाषा नोडल अधिकारी आरती रानी तथा आमंत्रित वक्ताओं द्वारा मंगलदीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।“हिंदी का उद्भव एवं उसका क्रमागत विकास” विषय पर आयोजित हिंदी परिचर्चा में पाँच वक्ताओं ने हिंदी भाषा के ऐतिहासिक एवं भाषावैज्ञानिक विकास पर क्रमबद्ध विचार प्रस्तुत किए। शिव मोहन गुप्त ने हिंदी के भाषावैज्ञानिक उद्भव पर प्रकाश डाला। प्रतिमा ठाकुर ने अपभ्रंश से प्रारंभिक एवं मध्यकालीन हिंदी के विकास पर वक्तव्य दिया। मनोज कुमार गुप्ता ने खड़ी बोली एवं आधुनिक हिंदी के स्वरूप पर चर्चा की। डॉ.अरुण रंजन ने हिंदी की बोलियों एवं लिपियों के विकास की व्याख्या की। जबकि अरविंद कुमार यादव ने आधुनिक हिंदी के गद्य पद्य तथा हिंदी के वैश्विक विस्तार पर अपने विचार रखे। परिचर्चा के दौरान“हिंदी साहित्य की परंपरा रामचरितमानस के स्वर में” विषय पर एक प्रभावशाली वृत्त-चित्र का प्रदर्शन किया गया। जिसमें रामचरितमानस के दोहों एवं चौपाइयों के माध्यम से हिंदी के जन-जन तक प्रसार को रेखांकित किया गया। प्रस्तुति में रामानंद सागर कृत रामायण धारावाहिक के चयनित संगीतों का प्रभावी उपयोग किया गया। जिसे उपस्थित श्रोताओं ने सराहा।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में परियोजना प्रधान सुशील कुमार अरजरिया ने कहा कि परिचर्चा के माध्यम से गहन विचार-विमर्श कर सार्थक निष्कर्षों तक पहुँचना संभव होता है तथा इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन अन्य विभागों में भी किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी वक्ताओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी परिचर्चा और वृत्तचित्र के संयोजक परिचालन अनुभाग के सहायक नियंत्रक यांत्रिकी दीनानाथ शर्मा द्वारा किया गया। अंत में डॉ.संज्ञा दास ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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