
रांची: अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) का दर्जा देने की मांग को लेकर कुड़मी समाज के लोगों ने आज झारखंड में ‘रेल टेका-डहर छेका’ (रेल रोको, रास्ता रोको) आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन के तहत, कुड़मी समाज के कार्यकर्ता विभिन्न रेलवे स्टेशनों की पटरियों पर बैठ गए, जिससे रेल यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया।

आंदोलन के मद्देनजर, राज्य के कई प्रमुख रेलवे स्टेशन पुलिस छावनी में तब्दील हो गए हैं। भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की हिंसक घटना से बचा जा सके। प्रदर्शनकारियों को पटरियों से हटाने और स्थिति को सामान्य करने के लिए प्रशासन कड़ी मशक्कत कर रहा है।

इस आंदोलन के कारण झारखंड से होकर गुजरने वाली और यहां से शुरू होने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से काफी लेट चल रही हैं या रद्द कर दी गई हैं। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई यात्री अपने परिवार के साथ, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं, स्टेशनों पर फंसे हुए हैं।
कुड़मी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जयराम महतो ने कहा कि सरकार हमारी मांग को लगातार नजरअंदाज कर रही है, इसलिए हमें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और आम जनता को परेशान न करें। हालांकि, आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं, जिससे हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
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