
सरायकेला,चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में भक्ति और उत्साह के साथ भगवान जगन्नाथ की घूरती रथ यात्रा निकाली गई। चांडिल स्टेशन दुर्गा मंदिर परिसर से शुरू हुई यह यात्रा सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में साधु बांध मठिया पहुंची।

नौ दिनों तक अपनी मौसी बाड़ी में विश्राम करने के बाद, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा आज विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत अपने मुख्य मंदिर लौट आए। काली मंदिर फंदोंलोगोड़ा और जूना अखाड़ा के महंत श्री विद्यानंद सरस्वती ने घूरती रथ यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भक्त, विशेषकर माताएं और बहनें, प्रभु जगन्नाथ के दर्शन करने और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना में भाग लेने के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने सभी पर महाप्रभु जगन्नाथ की कृपा बनी रहने की कामना की।

साधु बांध मठिया के महंत इंद्रानंद सरस्वती जी ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना और आरती के बाद भक्तों के साथ मिलकर “जगन्नाथ महाप्रभु” के जयघोष से पूरे वातावरण को गुंजायमान कर दिया। भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ रथ को खींचा।
घूरती रथ यात्रा के दौरान गाजे-बाजे और कीर्तन मंडलियां आगे-आगे चल रही थीं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया था। इस अवसर पर जगन्नाथ महाप्रभु का प्रसाद और खिचड़ी प्रसाद भी वितरित किया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने रथ पर सवार होकर सहकुशल मंदिर परिसर पहुंचे।
इस भव्य आयोजन में महंत विद्यानंद सरस्वती जी, इंद्रानंद जी, जयदा बाबा, महंत केशवानंद सरस्वती जी, हरेलाल महतो, मधु गोराई, राकेश बर्मा, पप्पू बर्मा, खगेन महतो सहित सैकड़ों की संख्या में भक्तगण शामिल हुए।
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