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लखीसराय में सरकारी नाली पर अवैध निर्माण, ग्रामीणों ने किया विरोध

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Byadmin

Jun 1, 2025

 

लखीसराय – ग्राम पंचायत राज मलिया द्वारा गांव में पक्की नाली का निर्माण पूर्व के वर्षों में कराया गया था लेकिन अब जमीन दाता ही उस नाले को बाधित कर उस पर मकान बनाने को तैयार है।

मामला मानपुर का है जहां लोगों ने इसको लेकर विरोध करते हुए कहा कि अब अगर इस नाले को ढककर मकान बनाया जाता है तो हम लोगों के घरों से और बरसात का निकलने वाला पानी बाधित हो जाएगा और पूरा इलाका पानी में डूब जाएगा। विरोध करने वाले लोगों ने कहा कि इसको लेकर जब बातचीत की गई तो जमीन दाता ने साफ कहा कि मैंने जमीनी दी थी और अब मैं मकान भी बनाऊंगा। ज्ञात हो कि शपथ संख्या 1136 सन 2008 में सरस्वती देवी पति सुनील भगत ने शपथ पत्र में यह दर्शाया था कि ग्राम पंचायत राज मालिया द्वारा गांव में पक्की नाली का निर्माण कराया जाएगा जिसका मेरे हिस्से की निजी जमीन निर्माण कार्य में जाएगा और चुकी कार्य जनहित के लिए है इसलिए इसके निर्माण में मुझे कोई अवरोध और आपत्ति नहीं होगा, इसके निर्माण कार्य में जितनी जमीन लगेगी उसे मैं किसी दवाव और लोभ के बिना स्वेच्छा से निर्माण हेतु दूंगा। लेकिन बीते वर्षों के उपरांत शपथकर्ता के परिवार के लोग ही अब नाले को बाधित कर घर बनाने को उतारु है।

वही ग्रामीण एजाज अहमद ने कहा कि हमारे जन्म से पूर्व यह नाला बना था और अब इसे भरकर घर बनाया जा रहा है इसने कहा कि इसको लेकर अधिकारी को आवेदन दिया गया है वही दूसरी और ग्रामीण सुमा देवी ने कहा कि जब घरों में पानी भर रहा था तो बड़ी मिन्नत के बाद इस नाले का निर्माण हुआ पर अब इसे बंद किया जा रहा है जो गलत है। वही जितेंद्र चौधरी ने कहा कि सरकार के द्वारा बना हुआ नाला बना ही रहे और अब इसे ढक दिया जा रहा है जबकि यह सरकारी नाला है और ऐसा नहीं होना चाहिए था। वही सरकार के आला अधिकारी से इनलोगों ने गुहार लगाते हुए कहा कि इसका उचित न्याय करते हुए नाले को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और यह नाला जिसे इन लोगों ने भरने का काम किया है इसे साफ भी किया जाए जिससे हमारे समस्याओं का निदान हो सके।

इसको लेकर अंचल अधिकारी ने एक चिट्ठी थाने को सौंपी मगर भवन का निर्माण काफी तेजी से किया जा रहा है जिससे लोगो का विश्वास अंचल अधिकारी और थाने के अधिकारी से उठ गया। सूत्रों की माने तो रस्सी में ढीलापन अंचल अधिकारी ने कर दी और ये समस्या उत्पन्न हो गई। अगर अंचल अधिकारी चाहते तो भवन निर्माण का वह हिस्सा जो निर्मित किया गया उसे ध्वस्त भी कर सकते थे या प्रशासनिक अधिकारी को लेकर उसपर रोक लगा सकते थे

मगर ना ही ऐसा हुआ और ना ही थाने के अधिकारी ने अपनी काबिलियत दिखाई। मगर इतना जरूर है कि अंचल अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों की पकड़ ढीली हुई या जानबूझकर ये किया गया जिससे भवन का निर्माण हो सके लोगो की समझ में आ गया। लोगो ने यह भी समझ लिया कि अंचल अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों से बढ़कर मनमानी करने वाले ये लोग कानून से ऊपर हैं और कानून इनकी नजर में बौना साबित हो रहा।


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