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भारतीय संस्कृति के प्रहरी : आचार्य किशोर कुणाल , Ex IPS ( 10 अगस्त ‘ 1950 – 29 दिसं,’ 2024 )

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ByBiru Gupta

Dec 30, 2024

 

 

*पटना:* गृहस्थ जीवन के बडे नौकरशाह भापुसे के संवर्ग को त्याग संतत्व की ओर , हिंदू समाज उद्धारक के रूप मे व प्रसिद्ध समाजसेवी ,उद्भट विद्वान आचार्य किशोर कुणाल देश मे परिचय के मोहताज कत्तई नहीं है । जीवन लंबी हो या न हो यश / कीर्ति बडी हो ,यही समझाकर इन्होने इस धरा का त्याग किया ।

अयोध्या विवाद मे सर्वोच्च न्यायालय मे इनकी निरंतर पैरवी , बहस व 800 पृष्ठ की इनकी लिखित पुस्तक ‘ Ayodhya Revisited ‘ ने न्यायाधीशों पर खासा प्रभाव डाला । 10 क, का दान इन्होने ‘ राम मंदिर ‘ निर्माण मे भी किया ।

ये ‘ बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ‘ के अध्यक्ष व पटना के प्राण व अकूत आस्था के केंद्र ‘ महावीर मंदिर ट्रस्ट ‘, चिकित्सा के क्षेत्र में ‘ महावीर आरोग्य संस्थान ‘ , ‘महावीर नेत्रालय ‘ , ‘ महावीर कैंसर संस्थान ‘ व शिक्षा के क्षेत्र में ‘ ज्ञान निकेतन ‘ स्कूल जैसे लब्धप्रतिष्ठित संस्थाओं के जनक व कुशल प्रबंधन हेतु सचिव रहने का गौरव प्राप्त हैं इन्हें ।

कैमूर हिल पर 343 AD के मंदिर ‘ मुंडेश्वरी भवानी मंदिर ‘ का जीर्णोद्धार व वैष्णो देवी ट्रस्ट की तरह की व्यवस्था कर स्थान को जाग्रत किया । 12 वीं शताब्दी के अंकोरवाट मंदिर , कंबोडिया के तर्ज पर पू, चंपारण मे विश्वस्तरीय ‘ विराट रामायण मंदिर ‘ का निर्माण भी इनकी अटूट धार्मिक निष्ठा के धरोहर का देश में अपवादिक उदाहरण हैं ।

आचार्य किशोर कुणाल को अविभाजित बिहार मे ‘ बैद्यनाथधाम मंदिर ट्रस्ट ‘ के सदस्य रहने का सौभाग्य भी हम झारखंडियों को मिला है । कतिपय द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रांगण मे ‘ बलि प्रथा ‘ के विरोध मे उन्होने सामयिक विद्वानों को शास्त्रार्थ की चुनौती दी थी । अंततः उन्होने कतिपय कारणो से त्यागपत्र दे दिया । वे सदैव सहिष्णु , समन्वयक व महावीर मंदिर, पटना मे अनु , जाति के विद्वान पंडित की नियुक्ति कर समरस समाज को प्रोत्साहित किया ।

आज से ही वे हमारे बीच नहीं है । परंतु उनके सेवा- कार्य , उनकी विद्वता , क्षमता ही उनके गुणों व परमार्थ को जग जाहिर करती है । वे अपने कतृत्व से सदैव जीवित रहेगें । अपितु बिहार सरकार उनके यशस्वी कतृत्व के लिए केंद्र सरकार से ‘ भारत रत्न ‘ की अनुशंसा कर एक उदाहरण पेश करे ऐसा विश्वास है । अंततः वे मात्र ‘ व्यक्ति ‘ नहीं स्वमेव एक ‘ संस्था ‘ थे ।

ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणो मे स्थान दे । विनम्र श्रद्धांजलि ।


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