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दीमक की भांति या स्वीट पॉइजन की भांति आंगनवाड़ी सेंटर पर सेविका कर रही गवन आखिर सीडीपीओ की जांच सिर्फ फाइलों को ही देखना या है नाटक।

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ByBiru Gupta

Dec 15, 2024

 

लखीसराय (सुजीत कुमार)- चानन प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी रवि कुमार ने शनिवार को आंगनवाडी केंद्रों की जांच की। जांच के क्रम मे रामपुर पहुंचे प्रखंड विकास पदाधिकारी ने सबसे पहले एक स्कूल का निरीक्षण कर स्कूल की विधि व्यवस्था के बारे में वहां के शिक्षकों को समझाया साथ ही बच्चों के विकास और बच्चों के देखभाल को लेकर बात की। वही दूसरी तरफ आंगनवाडी केंद्रों की जांच करने पहुंचने के दौरान किसी भी केंद्र पर बच्चे को शनिवार को मिलने वाले मीनू के हिसाब से फल में केला पपीता इत्यादि नहीं मिल पाया था। इसको लेकर जब प्रखंड विकास पदाधिकारी ने सेविका से बात की तो सेविका ने झूठ बोल अपना पल्ला झड़ना चाहा। मामला बजरंगबली मंदिर के नजदीक रामपुर वार्ड संख्या 11 सेक्टर 7 आंगनवाड़ी केंद्र संख्या 269 की थी जहां सेविका सोनी कुमारी सहायिका मीना देवी केंद्र पर मौजूद थी। इस दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बच्चों के मिलने वाले फल और नाश्ते के बारे में पूछा तो सेविका सोनी कुमारी ने कहा कि केला दिया गया है पर जब बच्चों से पूछा गया तो बच्चों ने साफ इनकार कर दिया, इसको लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी जब कड़े शब्दों में जवाब लिया तो सेविका ने कहा कि आज हम फल नहीं ला सके इसको लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि आखिर इसका पैसा किसको मिला, किसके पास बचा और किसने इस्तेमाल किया इसका जवाब आप हमें बताएं। इसको लेकर सेविका के मुंह से कोई आवाज नहीं निकल पाया। वही दूसरी ओर केंद्र पर 20 से 25 बच्चे ही नजर आए इसको लेकर सवाल करने पर सेविका ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को कहा कि ठंड के कारण और शादी विवाह के कारण बच्चों की उपस्थिति कम है। इसको लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि इस तरीके का बहाना बाजी कर बच्चों को मिलने वाले नाश्ते को अपनी वहीखाते में चढ़ाने का काम ना करें। ये तो साफ गवन करने की कहानी है। ऐसे में आपसे स्पष्टी मांगा जाएगा । अब सवाल उठता हैं कि

अगर 40 बच्चों के लिए प्रति एक केले की कीमत आंकी जाए तो तकरीबन 100 रुपए के आसपास यह रकम आ जाता है और ऐसे में एकाएक जांच होने पर यह सारा करनामा सामने आ जाता है तो एक माह में इस तरीके से कितने रुपयों का गवन कर लिया जाता होगा यह सोचना और समझना बड़ा मुश्किल हो जाता है जबकि केंद्रों पर पहुंचने वाले बच्चों के माता-पिता भी इस पर कोई ध्यान नहीं देते हैं और स्वीट पॉइजन की तरह यह कार्य किया जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसका गणित साफ है कि जांच किसी भी केंद्र पर किसी भी तरीके से नहीं होती है और कहीं ना कहीं इस गवन की हिस्सेदारी ऊपर अधिकारी से लेकर उन लोगों को भी मिल जाती होगी तभी तो झूठ बोलकर अधिकारी से बच निकलने की तरकीब अपनाते हैं लेकिन बड़े तरकीब जानने वाले अधिकारी कही मिल जाते है तो चंद मिनटों में यह कारनामा पकड़ लेते हैं और सेविका गिड़गिड़ाने लगती है कि इस बार गलती हो गई माफ कर दीजिए। अब सवाल उठता है कि इस पर किस प्रकार की कार्यवाई सीडीपीओ करेगी अथवा सिर्फ कार्रवाई के नाम पर झूठा दिलासा देकर फिर वही कहानी दोहराने वाली काम कर देगी जिससे इस तरीके का धीरे धीरे दीमक की तरह बच्चों के पेट का निवाला छीनने की कहानी जारी रहेगी या अब अगर किसी प्रकार का कोई कारवाई नहीं होता है तो इससे साफ पता चल जाएगा कि कहीं ना कहीं नीचे से ऊपर तक का यह मेलजोल वाली कहानी शामिल है और बच्चों के नाश्ते से भोजन तक पर ग्रहण लगाने का काम जारी है और सरकार को भरा हुआ रजिस्टर भेट कर दिया जा रहा है।


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