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राजकमल में हिंदी साहित्य पर परिचर्चा जिसमें सबका हित समाहित हो वही साहित्य है। सुमन्त कुमार मिश्रा

ByBiru Gupta

Dec 1, 2024

 

रिपोर्ट,अरुण कुमार सैनी

केंदुआ(धनबाद)राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर में पहली बार हिंदी भाषा के विभिन्न विषयों पर परिचर्चा आयोजित हुई, जिसमें हिंदी विभाग के सभी शिक्षक- शिक्षिकाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय के लगभग 142शिक्षक-शिक्षिकाएँ शामिल थीं। विद्यालय के प्राचार्य सुमन्त कुमार मिश्रा ने पहली बार विद्यालय में इस तरह का कार्यक्रम संपादित कराया उन्होंने कहा कि जो हृदय को छू जाए और जिसमें सबों का हित समाहित हो वही साहित्य है । हिंदी साहित्य का संसार काफी व्यापक एवं वृहद है ।आज हिंदी भाषा इतनी गौरवशाली है कि विश्व पटल पर यह जानी जाती है । हिंदी भाषा में एक से एक ऐसी रचनाएंँ है जो आज भी प्रासंगिक है।

इस परिचर्चा में जीवन में साहित्य की आवश्यकता, आधुनिक संदर्भ में भक्ति काल का प्रभाव, सामाजिक परिदृश्य साहित्य के आलोक में, समाज के नवनिर्माण में साहित्य की भूमिका, वैश्वीकरण और हिंदी भाषा, साहित्य जीवन के लिए प्रेरणा स्त्रोत, हिंदी साहित्य में रीतिकाल, समाज में साहित्य का महत्व, श्री रामचरितमानस में भक्ति नीति, साहित्य और समाज जैसे विषयों पर विस्तृत विचार हिंदी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने साझा किया।इस परिचर्चा में शामिल होने वाले शिक्षक- शिक्षिकाओं के नाम इस प्रकार हैं—

राकेश कुमार मिश्रा, कल्याण नारायण पाठक ,राेली सक्सेना, मधु सिन्हा ,सीमा सिंह, आरती दफ्तरी, अर्चना कुमारी, सपना कुमारी, मीना कुमारी एवं रोहित तिवारी । कार्यक्रम का मंच संचालन हिंदी शिक्षिका विजेता पाठक एवं रेणु कुमारी ने किया।इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य सुमन्त कुमार मिश्रा, उप प्राचार्या उमा मिश्रा , उप प्राचार्य मनोज कुमार, प्रभारी प्रतिमा चौबे ,कमलनयन, पार्थ सारथी सरकार, सुमोना दीक्षित एवं छंदा बनर्जी ने इस परिचर्चा की भूरी-भूरी प्रशंसा की एवं साहित्य की अनेक विधाओं पर विस्तृत जानकारी देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को धन्यवाद दिया।


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