
सरायकेला : लगातार बारिश से बढ़ा डैम का जलस्तर, खड़ी धान डूबी, ऊपर से हाथियों ने रौंदी फसल, रसुनिया पंचायत के किसान दोहरे संकट में ।
चांडिल अनुमंडल के रसुनिया पंचायत के किसान इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ दो दिनों से लगातार बारिश के बाद चांडिल डैम का जलस्तर बढ़ने से जलाशय के आसपास आंशिक इलाकों के खेतों में दूध भर रही धान की फसल डूब रही है, तो दूसरी तरफ दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से आए जंगली हाथियों का झुंड रात में खेतों में घुसकर खड़ी फसल को पैरों तले रौंद रहा है।

किसानों का कहना है कि पूरे साल की मेहनत से तैयार हुई फसल दोनों तरफ से बर्बाद हो रही है, जिससे उनकी कमर टूट गई है।

*पहला संकट : डैम का पानी बना आफत*
लगातार बारिश के कारण चांडिल डैम का जलस्तर 180 RL के ऊपर पहुंच गया है। सुवर्णरेखा परियोजना, डैम डिवीजन-2 द्वारा जल स्तर बढ़ाये जाने से रसुनिया पंचायत के निचले खेतों में पानी घुस गया है। खेतों में खड़ी धान की फसल जो अब दूध भरने की अवस्था में थी, वह जलमग्न हो गई है।
विस्थापित अधिकार मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि चांडिल परियोजना से विस्थापित परिवार वर्षों बाद भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। ऊपर से हर साल बरसात में यही कहानी दोहराई जाती है।
“डैम का जलस्तर संचालन करते समय किसानों की खड़ी फसल का ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रबंधन में पारदर्शिता और समय पर सूचना बहुत जरूरी है। पहले ही विस्थापन का दंश झेल चुके किसान पर फसल डूबने से अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।” – राकेश रंजन महतो
*दूसरा संकट : गजराज ने रौंदी फसल*
दूसरी तरफ चांडिल-दलमा हाथी कॉरिडोर से हाथियों का एक बड़ा झुंड भोजन और पानी की तलाश में रसुनिया पंचायत पहुंच गया है। रात होते ही झुंड खेतों में घुस जाता है और सैकड़ों एकड़ में लगी फसल को खाकर और रौंदकर बर्बाद कर रहा है।
हाथियों द्वारा जिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया गया है, उनमें प्रमुख हैं –
1. हेमंत कुमार महतो
2. पाठक चंद्र महतो
3. कार्तिक महतो
4. निवारण महतो
5. आशाराम महतो
6. भूदेव चंद्र महतो
7. राम चंद्र महतो
इसके अलावा कई अन्य किसानों के खेत भी प्रभावित हुए हैं।
राकेश रंजन महतो ने कहा कि हाथियों का मामला पूरी तरह वन विभाग से जुड़ा है। उन्होंने चांडिल वन क्षेत्र पदाधिकारी से मांग की है कि हाथियों के मूवमेंट वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए, ग्रामीणों को समय पर अलर्ट किया जाए और प्रभावित खेतों का स्थल निरीक्षण कर नियमानुसार मुआवजा दिया जाए।
“वन विभाग द्वारा सिर्फ मोबिल और पटाखे बांटने से मानव-हाथी संघर्ष का समाधान नहीं होगा। बरसात में हाथी झुंड में गांव और खेतों तक आकर उत्पात मचा रहे हैं, इसके लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था बनानी होगी।”
*अलग-अलग जिम्मेदारी तय हो*
मंच ने स्पष्ट किया कि दोनों समस्याएं अलग-अलग विभागों की हैं। बांध के जलस्तर का मामला जल संसाधन विभाग और सुवर्णरेखा परियोजना से जुड़ा है, जबकि फसल रौंदने का मामला वन विभाग से। दोनों को एक साथ मिलाने के बजाय संबंधित विभागों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
मंच ने जिला प्रशासन से मांग की है कि डैम प्रभावित और हाथी प्रभावित दोनों किसानों के खेतों का अलग-अलग सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जाए और मुआवजा प्रक्रिया शुरू की जाए।
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