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सरायकेला में हाथी का आतंक: घर तोड़ खाया 6 क्विंटल धान, बुजुर्ग की मौत

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Jun 12, 2026
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सरायकेला :चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बीती रात रुचाप पंचायत के रुचाप टोला सालडीह में जंगली हाथियों के झुंड ने एक ग्रामीण का घर तोड़ दिया और घर में रखा 6 क्विंटल धान खा गया। इसी क्रम में ईचागढ़ के बोनडीह गांव में हाथी के हमले से 60 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। लगातार घटनाओं से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

*सालडीह में घर तोड़ खाया धान, जान बचाकर दीवार से सटे परिवार*

प्राप्त जानकारी के अनुसार रुचाप टोला सालडीह निवासी राजू हेंब्रम के घर पर बीती रात हाथियों के झुंड ने हमला कर दिया। हाथियों ने घर को क्षतिग्रस्त कर दिया और घर में रखा लगभग 6 क्विंटल धान खा गए। घटना के दौरान राजू हेंब्रम की पत्नी एवं बच्चे किसी प्रकार घर की दीवार से सटकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

*बोनडीह में हाथी के हमले से बुजुर्ग की मौत*

क्षेत्र में बीते कई महीनों से लगातार हाथियों का उत्पात जारी है। बीती रात ही ईचागढ़ प्रखंड के लावा-कुटाम पंचायत अंतर्गत बोनडीह गांव में 60 वर्षीय चंपा सिंह मुंडा की हाथी के हमले में मौत हो गई। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक एवं भय का वातावरण है।

*वन विभाग पर लापरवाही का आरोप*

समाजसेवी राजू किस्कू ने कहा कि दलमा एवं आसपास के क्षेत्रों में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वन विभाग स्थिति को नियंत्रित करने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहा है। आए दिन किसी न किसी गांव में हाथियों द्वारा घर तोड़ने, फसल नष्ट करने और लोगों पर हमला करने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ग्रामीण पूरी रात जागकर अपने परिवार और संपत्ति की रक्षा करने को मजबूर हैं। कई परिवार भय के कारण रात में घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को विवश हैं।

उन्होंने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में न तो पर्याप्त निगरानी की व्यवस्था है और न ही ग्रामीणों को समय पर सूचना देने की कोई प्रभावी प्रणाली विकसित की गई है। लगातार जान-माल की हानि होने के बावजूद प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवजा भी नहीं मिल पाता है।

*खनन को बताया संघर्ष की वजह*

विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती अवैध पत्थर खन, अवैध बालू खन तथा पर्यावरणीय असंतुलन के कारण हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। जंगलों में लगातार हो रहे हस्तक्षेप के कारण हाथी अपने प्राकृतिक मार्गों से भटककर गांवों की ओर आ रहे हैं, जिससे हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है।

समाजसेवी राजू किस्कू और विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन ने प्रशासन से मांग की है कि हाथी-मानव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को रोकने हेतु निगरानी, त्वरित सूचना तंत्र और समय पर मुआवजा वितरण जैसी प्रभावी कदम तुरंत उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और अधिक चिंताजनक हो सकती है।


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