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सरायकेला में देश करम परब धूमधाम से समापन हुआ , कार्यक्रम में सभी ने लिया अपनी भाषा संस्कृति के संरक्षण का संकल्प

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Oct 4, 2026
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सरायकेला : सरायकेला के अन्तर्गत गम्हरिया प्रखंड के आसनबनी कालाडुंगरी के मैदान में दिनांक 04 अक्टूबर 2026 रविवार को देश करम परब के द्वारा एक दिवसीय देश करम महोत्सव 2026 बड़ी धूमधाम से मनाया गया।

 

सर्वप्रथम करम डाल के लिए 200 कन्याओं द्वारा पारंपरिक नृत्य करते हुए कार्यक्रम स्थल पहुंचे और पारंपरिक विधि- विधान के साथ करम डाल को आकड़ा में स्थापित कर पुजारी के द्वारा पूजा अर्चना की गई।साथ ही बहनों ने उपवास रखकर भाइयों के लिए सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा के बाद पुजारी ने करम पूजा के बारे में कहानी सुनाई ।

 

इस मौके पर कई अतिथियों का आगमन हुआ। सभी अतिथियों को देश करम परब के सदस्यों ने गाजे- बजे के साथ स्वागत करते हुए मंच पर पहुंचाया।

कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दल के नेतागण व समाजसेवी उपस्थित हुए। सभी ने अपनी भाषा संस्कृति को संरक्षित रखने का संकल्प लिया।

आसपास दूरदराज से 50 हजार की संख्या में कुडमी समाज के महिला पुरुष एवं अन्य समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

कार्यक्रम में 50 गांवों के करम दलों के महिलाओं ने सामूहिक गाजे बाजे के साथ एक से एक बढ़कर करम नृत्य प्रस्तुत किये। सभी दर्शकोंगण करम नृत्य देख कर खुशियों से झुमने लगे।

 

लव किशोर महतो ने कहा कि करम पर्व झारखंड की सभ्यता और संस्कृत के परिचायक है। यह पर्व प्रकृति के पर्व रूप मानते हैं। करमा की पहचान ही झारखंड की सभ्यता है।

 

कार्यक्रम में विजय प्रताप महतो ने कहा कि करम पर्व हमारे पूर्वज की दी हुई संस्कृति धरोहर है। यह त्योहार झारखंडी संस्कृति की पहचान है। इसे बचाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। झारखंड के आदिवासी कुडमी समाज के लोग करम त्यौहार को बड़े धूमधाम से मनाते हैं। करम राजा से धन संपत्ति ,सुख शांति व समृद्धि की कामना की जाती है। उन्होंने युवाओं से समाज की एकता और शिक्षा पर जोर दिया तथा कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई। आज झारखंड की जनजातियों की समक्ष अपनी संस्कृतिक विरासत को बचाए रखने की चुनौती है। कुड़मी समाज बिखरे हुए हैं। जिससे हम अपने अधिकारों से वंचित हैं। हमें इसी तरह की एकता अपने समाज के उत्थान के लिए दिखानी होगी।

 

समाजसेवी प्रभात रंजन महतो ने कहा कि धर्म कोड लागू करने, कुरमाली भाषा को आठवीं अनुसूचि में शामिल करने तथा कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग रखी।

 

देश करम परब को सफल संचालन के लिए समिति सदस्य मनोहर महतो , डॉक्टर जगदीश महतो ,सत्य प्रकाश महतो ,गोरा चाॅद महतो, विद्याधर महतो ,मनोज महतो, शैलेंद्र महतो , विजय महतो, हीरालाल महतो, बलराम महतो,लक्ष्मण महतो ,विजय प्रताप महतो , देबू महतो , अक्षय कान्त महतो,प्रकाश रंजन महतो , आदि प्रताप महतो, उमेश महतो , प्रकाश महतो, युष्टिठीर महतो, चितरंजन महतो , अरुण महतो, रतन महतो, मुनिराम महतो, आकाश महतो, पवन महतो, लालतू महतो , मंगल महतो ,कालू महतो एवं स्थानीय समाजसेवियों का सहरनीय योगदान।


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