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सरायकेला : नारायण आईटीआई चांडिल में दिनकर जी की पुण्यतिथि पर गूंजा राष्ट्रभाव

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Apr 24, 2026
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सरायकेला : नारायण आईटीआई लुपुंगडीह परिसर में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे ने कहा दिनकर जी हिंदी साहित्य के ऐसे महान कवि थे, जिनकी रचनाओं में राष्ट्रभक्ति, वीरता और सामाजिक चेतना की अद्भुत झलक मिलती है। उनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय में हुआ था और वे आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से एक थे।

उन्होंने आगे बताया कि दिनकर जी की प्रमुख कृतियों में रश्मिरथी, उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा, हुंकार, कुरुक्षेत्र एवं संस्कृति के चार अध्याय जैसी प्रसिद्ध पुस्तकें शामिल हैं। उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

“क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो,

उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।”

साथ ही,

“मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।”

जैसी पंक्तियों ने उपस्थित सभी लोगों में जोश और प्रेरणा का संचार किया।

वही डॉ. पांडे ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे दिनकर जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्रकवि को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से मौजूद रहे एडवोकेट निखिल कुमार शांति राम महतो, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, शुभम साहू,पवन महतो, कृष्णा पद महतो,गौरव महतो, एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।


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