
सरायकेला : चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच की 116 गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों में चल रही संवाद यात्रा के दूसरे चरण में बुधवार को पुनर्वास स्थलों की जमीनी हकीकत सामने आई। यात्रा रूयानी, पियालडीह, हाथीनादा, रामायगड़ा, रसुनिया, सुकसारी पुनर्वास, काटिया होते हुए तारकुआंग पुनर्वास तक पहुंची।
ग्रामीणों ने बताया कि विस्थापन के वर्षों बाद भी पुनर्वास कॉलोनियों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। सबसे बड़ा मुद्दा जमीन के पट्टे और भू-स्वामित्व का है। पट्टा नहीं होने से जाति, आवासीय और जमीन संबंधी दस्तावेज नहीं बन पा रहे और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा।

ग्रामीणों ने पुनर्वास स्थलों, श्मशान घाटों और सामुदायिक जमीन पर बाहरी लोगों के अतिक्रमण और अवैध कब्जे की भी शिकायत की।

मंच के अंजित किस्कू और आकलू धीवर ने कहा कि पुनर्वास केवल दूसरी जगह बसाना नहीं है, सरकार को सम्मानजनक जीवन की गारंटी देनी होगी। मंच ने मांग की है कि सभी पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं, जमीन का कानूनी पट्टा और अतिक्रमण वाली जमीनों का सीमांकन कर कार्रवाई की जाए।
यह संवाद यात्रा 7 से 12 सितंबर तक चलेगी। इसके बाद सामूहिक बैठक कर 116 गांवों से मिली समस्याओं के आधार पर आंदोलन की अगली रणनीति तय होगी। मंच ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने विस्थापन आयोग और पुनर्वास के लंबित मुद्दों पर ठोस पहल नहीं की तो व्यापक आंदोलन होगा।
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