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भागवत कथा के दूसरे दिन परीक्षित जन्म और कपिल अवतार की महिमा का वर्णन

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Sep 2, 2026
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जमशेदपुर। बिष्टुपुर सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में चल रहे भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को पूज्य स्वामी हिमांशु महाराज ने व्यासपीठ से परीक्षित जन्म और कपिल अवतार की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण में राजा परीक्षित के जन्म और भगवान कपिल के अवतार की कथाओं का विशेष महत्व है। यह दोनों प्रसंग भक्ति, ज्ञान और भगवान की शरणागति की महिमा को दर्शाते हैं। परीक्षित जन्म की कथा जहाँ भगवद-कृपा और शरणागति की महिमा गाती है, वहीं कपिल अवतार की कथा विवेक, वैराग्य और आत्मज्ञान का मार्ग प्रशस्त करती है। मनुष्य जीवन का महत्व समझते हुए भगवान की भक्ति में अधिक से अधिक समय देना चाहिए। कथावाचक ने कहा कि कभी भी किसी महात्मा का अपमान नहीं करना चाहिए। यदि हम अगर किसी संत का अपमान करते है तो भागवत प्राप्ति में बाधा डालती हैं। भागवत के जो मुख्य श्रोता है राजा परीक्षित, उनको श्राप के कारण श्री सुखदेवजी ने सात दिन की भागवत कथा श्रवण करायी। जिसमें उनका उत्थान हो गया। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु ने पांचवा अवतार कपिल मुनि के रूप में लिया। भगवान उसी ह्रदय में वास करते हैं, जिसका मन गंगा की तरह साफ हो। कथा व्यास हिमांशु जी ने शिव-पार्वती विवाह की महिमा का गुणगान करते हुए बताया कि श्वसुर दक्ष प्रजापति और दामाद भगवान शंकर में बेर के कारण सती जो कि भगवान ईश्वर की पत्नी थी ने अपने देह को यह सोचकर त्याग दिया कि भगवान शंकर का अपमान हुआ हैं। वही सती अगले जन्म में पार्वती बनी। इस कारण शिव और पार्वती का विवाह होता है। शिव और पार्वती का स्वरूप श्रद्धा और विश्वास माना जाता है। भगवान श्रद्धा और विश्वास से ही मिलते हैं। इस कथा से समाज को यह शिक्षा मिलती है कि जहां अपमान हो वहां कदापि नहीं जाना चाहिए। दूसरे दिन बुधवार को यजमान के रूप में अमित, सुमित, सुभाष मुनका, ओम, जीतु, पवन, प्रदीप मौजूद थे। साथ ही विश्वनाथ नरेड़ी, छितरमल धूत, अमित, सुमित, ओम, जीतु, नवल आगीवाल, अशोक नरेड़ी, अनील, सुनील की तरफ से प्रसाद का आयोजन किया गया था। तीसरे दिन गुरूवार को कथावाचक द्धारा धु्रव चरित्र और नरसिंह अवतार तथा चौथे दिन शुक्रवार को कृष्ण जन्म उत्सव की कथा का रसपान कराया जायेगा। इस मौके पर प्रमुख रूप से सुरेश कुमार अगीवाल, हरि शंकर सोंथालिया, श्याम सुंदर नागेलिया, अशोक नरेड़ी, सत्यनारायण नरेड़ी, अशोक संघी, सिताराम अग्रवाल समेत काफी संख्या में भक्तगण शामिल होकर कथा का आनन्द उठाया।


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