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पचड़ा-बुकरू-नायखाप के सैकड़ों युवा रोजगार की तलाश में सड़कों पर, स्थानीय जनप्रतिनिधि कहां हैं? युवाओं का सवाल—हमारे हक की लड़ाई में आखिर कौन देगा साथ?

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Nov 2, 2026
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संवाददाता अंतर्कथा केरेडारी बालमुकुंद दास

 

केरेडारी प्रखण्ड में एक तरफ कोयला परियोजनाओं के नाम पर स्थानीय ग्रामीणों की जमीन, जंगल और घर उजड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्हीं प्रभावित गांवों के सैकड़ों युवा रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। विडंबना देखिए कि जिन युवाओं के भविष्य का सवाल है, उनकी लड़ाई में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी अब तक नजर नहीं आई। युवा धरने पर बैठे हैं और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

मामला केरेडारी प्रखंड क्षेत्र में सीसीएल की प्रस्तावित चंद्रगुप्त कोल परियोजना का है। परियोजना से प्रभावित पचड़ा, बुकरू और नायखाप गांव के सैकड़ों बेरोजगार युवाओं ने रोजगार से जोड़ने की मांग को लेकर 1 नवंबर को दोपहर 2 बजे से परियोजना के समक्ष शांतिपूर्ण धरना शुरू किया। युवाओं का आरोप है कि उनकी जमीन-जंगल और घर उजड़ने के बावजूद उन्हें रोजगार में प्राथमिकता नहीं मिल रही है। वहीं, उनका दावा है कि परियोजना में करीब 85 प्रतिशत बाहरी लोगों को रोजगार से जोड़ा गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रभावित गांवों के युवा अपने हक और भविष्य के लिए धरने पर बैठे थे, तब स्थानीय जनप्रतिनिधि कहां थे? न स्थानीय जनप्रतिनिधियों का साथ दिखाई दिया और न ही सांसद-विधायक की ओर से तत्काल कोई पहल नजर आई। आखिर प्रभावित युवाओं की आवाज उठाने में जनप्रतिनिधियों को संकोच क्यों हो रहा है? क्या रोजगार का मुद्दा सिर्फ चुनावी मंचों तक ही सीमित रह गया है?

शाम ढलते ही धरनास्थल पर बदला माहौल

धरने पर बैठे युवाओं के अनुसार, शाम होते ही पगार ओपी प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और युवाओं को वहां से हटाने लगे। *इस दौरान सैकड़ों युवाओं को थाना ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया।

इसी वायरल वीडियो पर बड़कागांव *विधायक रोशन लाल चौधरी ने संज्ञान लेते हुए 2 नवंबर को धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाने में साथ देने की बात कही है।*

अब देखना यह होगा कि विधायक का यह आश्वासन धरातल पर कितना उतरता है और प्रभावित युवाओं को उनका हक दिलाने के लिए क्या ठोस पहल होती है।


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