
संवाददाता अंतर्कथा केरेडारी बालमुकुंद दास
केरेडारी/टंडवा (हजारीबाग/चतरा हजारीबाग मुख्य सड़क से गुजरना इन दिनों राहगीरों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। चट्टी बरियातू कोल खदान से कोयला ढुलाई में लगे हाइवा वाहनों के कारण सड़क पर बार-बार जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इससे आम राहगीरों, छोटे वाहन चालकों, मरीजों और दैनिक यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कोयला परिवहन से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होना आम बात बनती जा रही है। सवाल यह है कि कोयला ढुलाई से जुड़े वाहनों के परिचालन के दौरान सुचारु यातायात सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या प्रशासन को राहगीरों की इस परेशानी की जानकारी नहीं है, या फिर इस समस्या को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?

सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि लगातार जाम और आम लोगों की परेशानी के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल होती नहीं दिख रही है। वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
कोयला उत्पादन और परिवहन जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत आम जनता को जाम, समय की बर्बादी और परेशानी के रूप में क्यों चुकानी पड़े? आखिर कब तक राहगीर हाइवा के जाम में फंसे रहेंगे? अब जरूरत है कि प्रशासन, कोल प्रबंधन और जनप्रतिनिधि संयुक्त रूप से ठोस यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि कोयला ढुलाई भी बाधित न हो और आम लोगों का आवागमन भी सुगम बना रहे।
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