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धनबाद की दो बस्तियों का सर्वेक्षण: 93% परिवार गरीबी रेखा से नीचे, 80% घरों में शौचालय नहीं

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Aug 5, 2026
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सृष्टि अरिजीत एन्क्लेव, पुलिस लाइन के सामने, हीरापुर, धनबाद में ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड जिला इकाई धनबाद में “भविष्य के भारत” राष्ट्रीय व्यापी अभियान के तहत *भारत में शहरीकरण की चुनौतियां : धनबाद शहर के दो बस्तियों के सर्वेक्षण* के प्रतिवेदन को लेकर प्रेस – वार्ता संपन्न हुई ।

भारत ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. काशी नाथ चटर्जी ने कहा कि आज पूरी दुनिया में तीव्र शहरीकरण एक गंभीर चुनौती बन चुका है। विकसित देशों, विशेषकर जापान सहित अनेक देशों में भी शहरीकरण के साथ आवास, पर्यावरण और सामाजिक असमानता की समस्याएँ बढ़ी हैं। भारत में भी तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण झुग्गी-बस्तियों में रहने वाली आबादी निरंतर बढ़ रही है। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और अन्य बड़े शहर इसका उदाहरण हैं। धनबाद भी इससे अछूता नहीं है।

 

उन्होंने कहा कि किसी भी शहर का विकास केवल चौड़ी सड़कों, फ्लाईओवरों और ऊँची इमारतों से नहीं मापा जा सकता। वास्तविक विकास तब होगा जब शहर के सबसे गरीब और वंचित नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हों। इसी उद्देश्य से भारत ज्ञान विज्ञान समिति ने वर्ष 2025 में धनबाद की दो बस्तियों—खरिकाबाद और सिंदरी—के 220 परिवारों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया।

 

उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। लगभग 90 प्रतिशत परिवारों में केवल एक ही कमाने वाला सदस्य है। अधिकांश परिवार वर्षों से इन बस्तियों में रह रहे हैं, लेकिन उनके पास भूमि का स्वामित्व नहीं होने के कारण वे सरकारी आवास योजनाओं से वंचित हैं। खरिकाबाद में केवल 3 प्रतिशत और सिंदरी में मात्र 7 प्रतिशत परिवारों को आवास योजना का लाभ मिला है।

 

उन्होंने कहा कि खरिकाबाद के 80 प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं है तथा लगभग 79 प्रतिशत परिवार खुले में शौच करने को विवश हैं। अधिकांश परिवारों को घर के बाहर से पानी लाना पड़ता है और जलापूर्ति भी नियमित नहीं है। वर्षा के दिनों में खरिकाबाद के 92 प्रतिशत तथा सिंदरी के 71 प्रतिशत परिवार जलभराव से प्रभावित होते हैं। सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि दोनों बस्तियों के 93 से 94 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। यह स्थिति बताती है कि शहरी विकास की योजनाओं में गरीब बस्तियों की उपेक्षा गंभीर चिंता का विषय है।

 

उन्होंने कहा कि यह अध्ययन केवल समस्याओं को उजागर करने के लिए नहीं, बल्कि नगर निगम, राज्य सरकार और नीति-निर्माताओं को ठोस सुझाव देने के लिए किया गया है। यदि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो शहरी असमानता और सामाजिक संकट और गहरा होगा।

 

उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण का मार्गदर्शन देश के प्रसिद्ध शहरी नियोजन विशेषज्ञ प्रो. डॉ. अंतरीण चक्रवर्ती ने किया। वे ओडिशा सरकार में शहरी नियोजन के पूर्व समन्वयक रह चुके हैं तथा वर्तमान में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली में प्रोफेसर हैं। उनके मार्गदर्शन में ज्ञान विज्ञान समिति के कार्यकर्ताओं ने वैज्ञानिक पद्धति से यह अध्ययन सम्पन्न किया।

 

वैज्ञानिक जागरूकता उपसमिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. दीपक कुमार सेन ने कहा कि यह सर्वेक्षण स्पष्ट करता है कि शहरी विकास का वर्तमान मॉडल समावेशी नहीं है। जब तक बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक विकास अधूरा रहेगा। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन को पूरे धनबाद तथा झारखंड के अन्य शहरी क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाना चाहिए।

 

भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रवि सिंह ने कहा कि सर्वेक्षण के निष्कर्ष अत्यंत चिंताजनक हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि शहर की बड़ी आबादी आज भी बुनियादी नागरिक सुविधाओं से वंचित है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट प्रशासन के लिए चेतावनी भी है और जनपक्षीय शहरी विकास की दिशा में एक ठोस आधार भी।

 

समिति के राज्य उपाध्यक्ष हेमंत कुमार जायसवाल ने कहा कि धनबाद नगर निगम को बस्तियों के विकास के लिए समयबद्ध एवं समग्र कार्ययोजना बनानी चाहिए। भूमि अधिकार, आवास, पेयजल, स्वच्छता, जलनिकासी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

 

ज्ञान विज्ञान समिति, धनबाद के जिला सचिव भोला नाथ राम ने बताया कि लगभग 30 स्वयंसेवकों ने लगभग 20 दिनों तक घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया। प्रत्येक परिवार से विस्तार से बातचीत कर तथ्यों का संकलन किया गया। यह अध्ययन पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति, जनसहभागिता और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ सम्पन्न किया गया।

जनवादी युवा आंदोलन के साथी विकास कुमार ठाकुर ने कहा कि उन्होंने स्वयं बस्तियों में जाकर लोगों की परिस्थितियों को निकट से देखा। यह सर्वेक्षण केवल आँकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज़ है जो वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यदि इस रिपोर्ट की अनुशंसाओं को लागू किया जाए तो धनबाद के शहरी विकास को अधिक न्यायपूर्ण और मानवीय दिशा मिल सकती है।

इस अवसर पर ज्ञान विज्ञान समिति ओड़िसा की समता संयोजिका मिनाती स्वेन, रानी मिश्रा, मुकेश कुमार तथा प्रो. जितेंद्र बनर्जी, मधेश्वर नाथ भगत सहित भारत ज्ञान विज्ञान समिति के अनेक कार्यकर्ता एवं बुद्धिजीवी उपस्थित थे।

 


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