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तीन दिवसीय भोजपुरी चित्रकला कार्यशाला के दूसरे दिन रहा रंगो से सरावोर

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Sep 27, 2026
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छपरा : शहर का सारण संग्रहालय रविवार को भोजपुरी लोकजीवन के रंगों से सरावोर रहा। कहीं पीड़िया की लोकसंस्कृति आकार ले रही थी। कहीं गोधन की परंपरा रंगों में ढल रही थी। कोहबर, तुलसी चौरा और भित्ति चित्रों के जरिए भोजपुरी समाज की लोक-संस्कृति कैनवास पर अपनी कहानी कह रही थी।

छपरा के पचमेल फाउंडेशन और पटना के आसरा सेवा केन्द्र के सौजन्य से आयोजित तीन दिवसीय भोजपुरी चित्रकला कार्यशाला के दूसरे दिन प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए करीब दो दर्जन स्त्री पुरुष चित्रकारों ने अपनी तूलिका से भोजपुरी लोकजीवन के विविध रूपों को कैनवास पर उतारा। कलाकारों ने पूरे दिन अपनी सृजनशीलता के माध्यम से उन लोक परंपराओं को रंग और आकार दिया, जो पीढियों से भोजपुरी समाज के जीवन का हिस्सा रही है।

*लोक परंपराओं को मिल रही नई पहचान

कार्यशाला में उभरते चित्रों में भोजपुरिया गांव का आंगन, लोक आस्था, संस्कार और पारंपरिक जीवन-शैली अलग- अलग रंगों में दिखाई दी। इन चित्रों में केवल कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी सांस्कृतिक स्मृति भी दर्ज है , जो तेजी से बदलते समय में कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं।

पचमेल के निदेशक डा. पृथ्वीराज सिंह और डा. अमरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि एक ओर भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए संघर्ष जारी है, वहीं दूसरी ओर चित्रकार भोजपुरी चित्रकला को देश और विदेश में पहचान दिलाने के प्रयास में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि भोजपुरी संस्कृति केवल भाषा, गीत-नृत्य और साहित्य तक ही सीमित नहीं है, उसकी अपनी समृद्ध चित्र परंपरा भी है।

वहीं शिवानुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि सारण संग्रहालय में उभरे ये रंग दरअसल भोजपुरी लोकजीवन की उन स्मृतियों के रंग हैं, जिन्हें चित्रकारों ने कैनवास पर सहेजकर नई और आने वाले पीढियों के लिए एक सांस्कृतिक दस्तावेज का रूप देने की कोशिश की है।

*सोमवार को प्रदर्शनी और परिचर्चा

कार्यशाला की व्यवस्था में दिन-रात जुटे अमन सिंह और भवंर निगम ने बताया कि सोमवार को कार्यशाला के अंतिम दिन कलाकारों द्वारा यहां बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके साथ ही भोजपुरी चित्रकला के स्वरूप और विस्तार पर परिचर्चा होगी। परिचर्चा में बिहार कला मंच के वीरेन्द्र सिंह, पद्मश्री श्याम शर्मा, बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक सिन्हा सहित अन्य कला और साहित्य से जुडे़ लोग अपने विचार रखेंगे।

अंत में समापन समारोह आयोजित होगा, जिसमें महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल मुख्य अतिथि और छपरा विधायक छोटी कुमारी विशिष्ट अतिथि होंगे। मुख्य कलाकारों में रौशन राय, सुनिता राय, रूपा कुमारी, अनिता पाण्डेय ,सुशिल विश्वकर्मा, रूकसार प्रविण, मधु सिंह, गुड़िया कुमारी, अंकिता सिन्हा, अंजली तिवारी, प्रियंका कुमारी, प्रियंका गुप्ता,कृपिता गुप्ता, कमलेश कुंदन सभी स्थानीय कलाकारों ने मिलकर भोजपुरी चित्र शैली को बड़ा ही बारीकी से चित्रित किया है।


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