
रिपोर्ट,अरुण कुमार सैनी
केंदुआ(धनबाद) 3 नवंबर: जनजातीय गौरव दिवस पखवाड़ा (1 से 15 नवंबर) के तहत भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के मौके पर देशभर में आदिवासी समाज की विरासत, इतिहास, परंपरागत ज्ञान, स्वतंत्रता सेनानियों और उनकी उपलब्धियों को याद किया जा रहा है। इस मौके पर IIT (ISM) धनबाद भी डिजिटल एजुकेशन और टेक्नोलॉजी स्किल ट्रेनिंग के जरिए आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने की अपनी पहल को सामने ला रहा है। यह योजना के तहत भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) के सहयोग से संचालित संस्थान के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के माध्यम से अब तक 3,000 से अधिक आदिवासी छात्रों को कंप्यूटर एजुकेशन और एडवांस आईटी ट्रेनिंग दी जा चुकी है वहीं डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग के तहत संचालित इस कार्यक्रम की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (PI) असिस्टेंट प्रोफेसर प्रो. रश्मि सिंह हैं। इसमें डॉ. नीलाद्रि दास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस पहल के तहत झारखंड के सात एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों (EMRS) में ट्रेनिंग दी जा रही है। इनमें साहिबगंज का भोगनाडीह, गोड्डा का तसारिया, दुमका का काठीजोरिया, रांची का सालगाडीह, गुमला का बसिया, लोहरदगा का कुजरा और पश्चिमी सिंहभूम का टोरसिंदि शामिल हैं। वहीं इस शैक्षणिक सत्र 2024-25 में कुल 1,501 छात्रों ने बेसिक लेवल की कंप्यूटर ट्रेनिंग पूरी की। एवं, 2025-26 में 1,504 छात्रों ने नामांकन कराया। इनमें से 725 छात्र बेसिक मॉड्यूल और 779 एडवांस मॉड्यूल में शामिल हैं। खास बात यह है कि मौजूदा सत्र के कुल प्रतिभागियों में 981 छात्राएं हैं, जो करीब 65 फीसदी है।

ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को बेसिक स्तर पर MS Office, Excel, Tally और Python की जानकारी दी जाती है। इसके बाद एडवांस मॉड्यूल में Advanced Excel, MS Access, MS Project, Advanced Tally और Power BI की ट्रेनिंग दी जाती है। क्लासरूम टीचिंग के साथ लैब में प्रैक्टिकल, परीक्षा और डाउट क्लियरिंग सेशन भी आयोजित किए जाते हैं। वहीं कार्यक्रम में

प्रो. रश्मि सिंह ने कहा, “आज के दौर में डिजिटल लिटरेसी शिक्षा, रोजगार और बदलती टेक्नोलॉजी के साथ कदम मिलाने के लिए बेहद जरूरी है। हमारी कोशिश है कि आदिवासी छात्रों, खासकर छात्राओं को टेक्नोलॉजी सीखने के समान अवसर मिलें और वे आत्मविश्वास के साथ आगे की पढ़ाई और करियर के नए विकल्प तलाश सकें।”उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन भी किया गया है। ट्रेनिंग से पहले छात्रों का औसत स्कोर 6.29 था, जो ट्रेनिंग के बाद बढ़कर 11.25 हो गया। यह करीब 79 फीसदी का सुधार है। इसके व्यापक प्रभाव को समझने के लिए डिजिटल लिटरेसी, पढ़ाई के प्रदर्शन, आत्मविश्वास और करियर संबंधी आकांक्षाओं पर आधारित Cluster Randomized Controlled Trial का फ्रेमवर्क भी तैयार किया गया है। इस संस्थान की पहल केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है। आदिवासी परिवारों की जमीनी जरूरतों और विकास से जुड़ी चुनौतियों को समझने के लिए 3,574 परिवारों का सर्वे भी किया गया है। इसके अलावा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के SEED डिवीजन के सहयोग से करीब 60.75 लाख रुपये की लागत वाली परियोजना के तहत जामताड़ा जिले के छह प्रखंडों में अनुसूचित जनजाति समुदायों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में काम किया गया। यह परियोजना अगस्त 2025 में पूरी हुई। शिक्षा, रिसर्च और जमीनी स्तर पर सामुदायिक भागीदारी के जरिए IIT (ISM) धनबाद आदिवासी युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है।
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