

रिपोर्ट: सन्नी शर्मा

धनबाद: धनबाद की तपती धूप और चिलचिलाती गर्मी के बीच इन दिनों एक नया ‘हीटवेव’ चल रहा है ” एयरपोर्ट पॉलिटिक्स ” शहर में कोयले की धूल उड़े न उड़े, लेकिन बयानों की चिंगारी ऐसी उड़ रही है कि रणधीर वर्मा चौक से लेकर जिला कांग्रेस मुख्यालय तक माहौल धुआं-धुआं है।
बीजेपी का ‘रनवे’ वाला धरना: “हवा में उड़ेगा धनबाद, बस सरकार दे दे साथ”
गुरुवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर केसरिया रंग का जमावड़ा लगा। मौका था सांसद ढुल्लू महतो के नेतृत्व में भाजपा का हल्ला बोल। भाजपा का सीधा और सपाट आरोप है: “हम तो धनबाद को पंख लगाना चाहते हैं, लेकिन राज्य सरकार ने रनवे पर रोड़े अटका रखे हैं।” सांसद ढुल्लू महतो के साथ पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह , बाघमारा विधायक शत्रुघन महतो भी मंच पर डटे नजर आए। भाजपा का कहना है कि राज्य सरकार की अड़ंगेबाजी की वजह से धनबाद एयरपोर्ट का सपना फाइलों में कैद है। गर्मी चाहे जितनी हो, लेकिन कार्यकर्ताओं के नारों में जोश कम नहीं था। ऐसा लग रहा था मानो धरना स्थल से ही सीधे फ्लाइट टेक-ऑफ करने वाली है।
कांग्रेस का ‘तीखा तड़का’: “नाटक छोड़ो, काम करो!”
इधर भाजपा ने धरना खत्म किया, उधर कांग्रेस ने मोर्चा संभाल लिया। धनबाद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष संतोष सिंह ने बिना देर किए एक ऐसी ‘गुगली’ फेंकी कि सियासत और गरमा गई। संतोष सिंह ने सांसद ढुल्लू महतो को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह सब सिर्फ “पॉलिटिकल ड्रामा” है।
संतोष सिंह के ‘पंच’ लाइन्स: “नगर निगम चुनाव में जो हुआ, उसके बाद अपनी गिरती साख बचाने के लिए अब जनसेवक बनने का स्वांग रचा जा रहा है। धनबाद की जनता को बेवकूफ बनाना बंद करें।”
उन्होंने सीधे हमला करते हुए कहा कि सांसद को नाटक करने के बजाय काम करके दिखाना चाहिए।
जनता का क्या? एयरपोर्ट का ‘जिन्न’ और वोटरों की उम्मीद
धनबाद में एयरपोर्ट का मुद्दा कोई नया नहीं है, यह वो ‘पुराना जिन्न’ है जो हर राजनीतिक हलचल के वक्त बोतल से बाहर आता है।
सियासी गणित: निगम चुनाव के बाद अब हर दल अपनी जमीन मजबूत करने में जुटा है।
पब्लिक का मूड : जनता बस ये सोच रही है कि नेताजी लोग तो एसी गाड़ियों में घूम रहे हैं, लेकिन क्या सच में कभी धनबाद के आसमान में कमर्शियल फ्लाइट्स की गड़गड़ाहट सुनाई देगी? या फिर यह सिर्फ चुनावी ‘टेक-ऑफ’ की तैयारी है?
फिलहाल तो धनबाद में न तो एयरपोर्ट बना है और न ही गर्मी कम हुई है। लेकिन एक बात साफ है— ढुल्लू महतो का ‘धरना’ बनाम संतोष सिंह का ‘हमला’ आने वाले दिनों में कोयलांचल की राजनीति को और भी ज्यादा दिलचस्प बनाने वाला है।
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