
पटना: केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को मिली एक संदिग्ध आतंकी धमकी के बाद देश का सुरक्षा तंत्र और बिहार पुलिस हाई अलर्ट मोड पर आ गई है। धमकी भरा पत्र मिलने के तुरंत बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए चिराग पासवान की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है, वहीं बिहार पुलिस की विशेष टीम (STF) और खुफिया एजेंसियां इस पूरे मामले की गहनता से जांच में जुट गई हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस धमकी के पीछे आतंकी नेटवर्क या असामाजिक तत्वों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने चिराग पासवान के आवास और उनके कार्यक्रमों के स्थलों पर सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया है। पटना से लेकर दिल्ली तक उनके यात्रा रूट और बैठकों के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं। खुफिया विभाग इस बात की पड़ताल कर रहा है कि यह धमकी कहां से और किस माध्यम से भेजी गई है।

चिराग पासवान को धमकी मिलने की खबर से बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। सत्तापक्ष और एनडीए के नेताओं ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। एनडीए नेताओं का कहना है कि बिहार के लोकप्रिय युवा नेता को डराने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी और केंद्र व राज्य सरकार दोषियों को बख्शेगी नहीं।

वहीं, विपक्ष ने भी इस मामले में त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने राज्य और देश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब केंद्रीय मंत्रियों तक को ऐसी धमकियां मिल रही हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या आलम होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद बिहार में सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहसों के केंद्र में आ गया है।
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