
*चाईबासा* पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय सभागार में रविवार को जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त की अध्यक्षता में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिले के निजी विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस , जिला शिक्षा पदाधिकारी , जिला शिक्षा अधीक्षक सहित विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्य एवं संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि आरटीई के सभी प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र बच्चों के नामांकन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरटीई के तहत नामांकित बच्चों सहित किसी भी छात्र-छात्रा के साथ भेदभाव, असमान व्यवहार अथवा उपेक्षा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उपायुक्त ने सभी निजी विद्यालयों में वाहन सुरक्षा एवं फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंधन सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें, ताकि बच्चों को सुरक्षित और संरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके।

बैठक में विद्यालयों को केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों में सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता विकसित करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। उपायुक्त ने सड़क सुरक्षा, मलेरिया एवं डायरिया से बचाव, तंबाकू निषेध, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली जैसे विषयों पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने सरकारी विद्यालयों की तर्ज पर निजी विद्यालयों में भी “बोलेगा सिंहभूम” एवं “आज क्या सीखे” कार्यक्रमों का नियमित संचालन सुनिश्चित करने को कहा। उनके अनुसार इन कार्यक्रमों से विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता, तार्किक सोच, संवाद कौशल और आत्मविश्वास का विकास होगा। साथ ही प्रत्येक विद्यालय में हर माह “खेल महोत्सव” आयोजित करने तथा प्रत्येक माह की 20 तारीख को बच्चों का सामूहिक “जन्मोत्सव” मनाने का भी निर्देश दिया गया।
सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत उपायुक्त ने सभी निजी विद्यालयों से “निक्षय मित्र” बनकर टीबी मरीजों को गोद लेने और उनके पोषण एवं उपचार में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय परिसरों में व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाने और लगाए गए पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है।
बैठक के दौरान जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित उपस्थिति, सुरक्षा मानकों के अनुपालन तथा जिला प्रशासन द्वारा संचालित नवाचार कार्यक्रमों में निजी विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक के अंत में उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी एवं निजी विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सुरक्षा, सामाजिक संवेदनशीलता और समग्र व्यक्तित्व विकास को नई दिशा देना है। उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन से निर्देशों का गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित करने की अपील की, ताकि पश्चिमी सिंहभूम शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में एक आदर्श जिला बन सके।
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