
बिहार में नाबालिग बच्चियों के शोषण में लिप्त आर्केस्ट्रा समूहों के खिलाफ जारी कार्रवाई के तहत सारण जिले में रातभर चले अभियान में 13 आर्केस्ट्रा समूहों से सात नेपाली लड़कियों समेत 21 बच्चियों को मुक्त कराया गया। इस दौरान 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) की सूचना पर सारण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार के नेतृत्व में की गई। अभियान में सारण पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू), कई थानों की पुलिस टीमों के साथ एवीए और नारायणी सेवा संस्थान भी शामिल थे। दोनों संगठन बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी हैं।


मुक्त कराई गई बच्चियों की उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच है। इन्हें नेपाल, असम, पश्चिम बंगाल, ओड़ीशा, झारखंड और मध्य प्रदेश से ट्रैफिकिंग के जरिए लाया गया था। प्रारंभिक काउंसलिंग के दौरान कई बच्चियों ने बताया कि उन्हें अच्छी नौकरी, चमकदार जिंदगी और आकर्षक कमाई का लालच देकर फंसाया गया। जाल में फंसने के बाद उन्हें शादियों और अन्य आयोजनों में घंटों तक अश्लील भोजपुरी गीतों पर प्रस्तुति देने के लिए मजबूर किया जाता था। इस दौरान कई बच्चियों को दर्शकों की ओर से यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का भी सामना करना पड़ा।
मुक्त कराई गई झारखंड की एक अनाथ बच्ची ने बताया कि करीब 15 वर्ष की उम्र में एक व्यक्ति ने बेहतर जीवन का सपना दिखाकर उससे शादी कर ली, लेकिन कुछ ही समय बाद उसे छोड़ दिया। उसी व्यक्ति ने उसकी मुलाकात एक महिला से कराई, जिसने नौकरी और “बेहतर भविष्य” का भरोसा देकर उसे अपने साथ आने के लिए राजी किया। बाद में उस महिला ने उसे गोलू नाम के व्यक्ति को बेच दिया, जिसे इस अभियान के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। काउंसलिंग के दौरान बच्ची फूट-फूटकर रो पड़ी। उसने कहा कि पिछले तीन वर्षों से वह निराशा में जी रही थी और उसे उम्मीद नहीं थी कि वह इस जाल से बाहर निकल पाएगी।
राज्यों और सीमाओं के पार संचालित आर्केस्ट्रा समूहों और बच्चों की ट्रैफिकिंग के गहरे गठजोड़ पर जोर देते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने कहा, “भारत बच्चों की ट्रैफिकिंग के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में खड़ा है, लेकिन इस अपराध को समाप्त करने के लिए पूरे समाज और पूरी शासन व्यवस्था को मिलकर काम करना होगा। देशभर में बच्चों को यौन शोषण और ट्रैफिकिंग जैसे उत्पीड़न से सुरक्षित करना जरूरी है। बच्चों को मुक्त कराने और ट्रैफिकिंग गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई में सरकार और पुलिस जो उल्लेखनीय काम कर रही है, उसे अब फास्ट-ट्रैक अदालतों में त्वरित सुनवाई और अदालतों से मुआवजे की रकम जल्द जारी कर मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।”
एवीए की टीम की ओर से एक महीने तक की गई गहन पड़ताल के बाद छापे की यह कार्रवाई की गई। टीम ने उन आर्केस्ट्रा समूहों की पहचान की, जहां नाबालिग बच्चियों के होने की आशंका थी। सदस्यों ने ग्राहक बनकर वहां जानकारी जुटाई और कई बार जाकर स्थिति की पुष्टि की। पुष्टि होने के बाद यह सूचना सारण पुलिस के साथ साझा की गई, जिसके आधार पर यह रेस्क्यू अभियान चलाया गया।
जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, “यह बेहद चिंताजनक है कि संगठित ट्रैफिकिंग नेटवर्क राज्यों और सीमाओं के पार से संचालित आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए बच्चों का शोषण कर रहे हैं। यह कोई अलग-थलग अपराध नहीं, बल्कि मांग, कानूनों पर अमल में ढिलाई और बच्चों की असुरक्षा पर टिका एक संगठित आपराधिक तंत्र है। बिहार पुलिस की हालिया कार्रवाइयां इन अपराधों के प्रति बढ़ती गंभीरता को दिखाती हैं, लेकिन इस तरह के नेटवर्क को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए राज्यों के बीच मजबूत समन्वय, कड़ी निगरानी और शोषण की पूरी श्रृंखला में शामिल हर व्यक्ति की जवाबदेही तय करना जरूरी होगा।”
बताते चलें कि दो दिन पहले गोपालगंज जिले में भी एवीए, नारायणी सेवा संस्थान, पुलिस और एएचटीयू की संयुक्त टीम ने रातभर चले अभियान में 15 आर्केस्ट्रा समूहों से 44 नाबालिग बच्चियों को मुक्त कराया था।
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