
सरायकेला :चांडिल प्रखंड सह अंचल अंतर्गत गौरीपूड़ी-सिली गांव से जुड़ा एक वायरल वीडियो इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में एक व्यक्ति के पास 500-500 के बंडलों में बड़ी मात्रा में नकदी दिखाई दे रही है। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वीडियो के सामने आने के बाद चांडिल अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार उक्त व्यक्ति अंचल कार्यालय का न तो कर्मचारी है और न ही कोई पदाधिकारी, इसके बावजूद उसके यहां अंचल से जुड़े लोगों की आवाजाही और जमीन संबंधी मामलों में उसकी कथित भूमिका को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। सवाल यह है कि यदि उसकी कोई आधिकारिक भूमिका नहीं है, तो जमीन के म्यूटेशन में उसकी भूमिका क्या है?

*रैयती के साथ सरकारी प्लॉट हड़पने का आरोप*

चर्चा है कि एक रैयती प्लॉट के साथ आसपास के सरकारी प्लॉटों को भी अपने नाम कराने के लिए कथित रूप से बड़ी रकम का लेन-देन किया गया है। क्षेत्र में लंबे समय से यह चर्चा है कि एक म्यूटेशन के लिए 10 से 15 लाख रुपये तक की कथित मांग की जाती है।
ऐसे में बड़ा सवाल है –
– क्या पैसे देने से जमीन की प्रकृति बदल जाती है?
– क्या सरकारी जमीन पैसे के बल पर रैयत के नाम चढ़ सकती है?
– क्या सरकारी रिकॉर्ड और नियम-कानून पैसे से बदले जा सकते हैं?
प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि गौरीपूड़ी-सिली, डोबो और कपाली मौजा के संबंधित खाता-प्लॉट की वर्तमान प्रकृति और स्वामित्व क्या है और किस आधार पर म्यूटेशन किया गया है।
*जमीन विवाद से बढ़ा अविश्वास*
चांडिल में जमीन विवाद अब केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। 24 अगस्त 2026 को चांडिल थाना क्षेत्र के 10th Mile Stone होटल में कारोबारी निखार सबलोक पर हुए जानलेवा हमले और बाद में उनकी मौत के मामले में भी जमीन विवाद के एंगल की चर्चा सामने आई है, जिससे क्षेत्र में जमीन कारोबार को लेकर चिंता और बढ़ गई है। हालांकि इस मामले में पुलिस जांच जारी है।
*विस्थापित अधिकार मंच ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग*
इस पूरे मामले पर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता का है। उन्होंने उपायुक्त सरायकेला-खरसावां से मांग की है कि –
1. वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिख रही नकदी के स्रोत की निष्पक्ष जांच हो।
2. संबंधित व्यक्ति की आय, संपत्ति, बैंक खातों की वैधानिक जांच कराई जाए।
3. गौरीपूड़ी-सिली, डोबो और कपाली के संबंधित प्लॉटों के पिछले 10 वर्षों के राजस्व रिकॉर्ड की जांच हो।
4. सरकारी जमीन के अवैध म्यूटेशन और हस्तांतरण की जांच हो।
5. अंचल कार्यालय के किसी कर्मचारी, अधिकारी या बिचौलिए की भूमिका पाए जाने पर सख्त कार्रवाई हो।
6. पिछले वर्षों में संदिग्ध तरीके से हुए म्यूटेशन और जमीन की प्रकृति परिवर्तन का विशेष ऑडिट कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि अब देखना यह है कि प्रशासन इस वायरल वीडियो को गंभीरता से लेकर जांच करता है या फिर यह सवाल भी फाइलों में दब कर रह जाएगा।
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