
सरायकेला – जिला मुख्यालय सरायकेला का मुख्य बाजार इन दिनों भीषण जाम और प्रशासनिक उदासीनता का गवाह बना हुआ है। बैंक ऑफ इंडिया सरायकेला शाखा से लेकर पुराना बस स्टैंड तक की सड़क पर आए दिन लगने वाले महाजाम ने आम जनता से लेकर राहगीरों तक का जीना मुहाल कर दिया है। रोजाना घंटों लगने वाले इस जाम के कारण न सिर्फ लोगों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह चरमरा गई हैं।
स्थानीय लोगों और राहगीरों के अनुसार, इस भीषण जाम का सबसे बड़ा और मुख्य कारण सड़क के दोनों किनारों पर किया गया अवैध अतिक्रमण है। दुकानदारों द्वारा सड़क तक अपनी दुकानें बढ़ा लेना, फुटपाथों पर अवैध कब्जा और नो-पार्किंग क्षेत्र में बेतरतीब ढंग से खड़े वाहन इस समस्या को हर दिन और गंभीर बना रहे हैं। सड़क चौड़ी होने के बावजूद अतिक्रमण के कारण सिकुड़ कर पतली गली में तब्दील हो गई है।

*आपातकालीन सेवाओं पर संकट, मंडरा रहा बड़ा खतरा*

यह जाम सिर्फ यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि अब लोगों की जान पर भी बन आई है। बाजार क्षेत्र में यदि किसी मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस फंस जाए, तो उसे निकालने में पसीने छूट जाते हैं। वहीं, खुदा न खास्ता अगर क्षेत्र में कोई अगलगी की घटना हो जाए, तो अग्निशमन (दमकल) वाहनों का समय पर पहुंचना नामुमकिन सा हो गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि किसी दिन यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
*प्रशासनिक नजरअंदाज से जनता में आक्रोश*
आने-जाने वाले राहगीरों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। समय-समय पर सिर्फ औपचारिकता के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाता है, लेकिन कुछ ही घंटों बाद स्थिति जस की तस हो जाती है। जनता का स्पष्ट कहना है कि इस बार प्रशासन को इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
*स्थानीय लोगों की मांग:*
बैंक ऑफ इंडिया से पुराना बस स्टैंड तक नियमित रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाए।
बाजार क्षेत्र में वाहनों की पार्किंग के लिए एक निश्चित स्थान (पार्किंग जोन) तय हो।
व्यस्ततम समय में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगे और ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती की जाए।
सड़क पर दोबारा अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कानूनी व आर्थिक कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए कब तक ठोस कदम उठाता है, या फिर जनता को इसी तरह रोज़मर्रा के इस नारकीय जाम से जूझना पड़ेगा।
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