
सरायकेला : शहर की गलियों, चौक-चौराहों और मंदिरों के बाहर मिट्टी के घड़ों से सजी प्याऊ, सिर्फ पानी पिलाने की जगह नहीं होती थीं, बल्कि वह इंसानियत, सेवा और अपनत्व की जीवित मिसाल हुआ करती थीं। आज जब गर्मी अपने चरम पर है और पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है, तब उन प्याऊओं की याद और भी गहरी हो जाती है।

*मजदूर दिवस पर शुरू हुई प्याऊ:*

इसी पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिए _हिन्दुस्तान बोले संवेदना टीम_ ने मजदूर दिवस के अवसर पर RIT थाना क्षेत्र के गायत्री स्कूल के समीप प्याऊ की व्यवस्था की है। बुधवार को RIT थाना प्रभारी संजीव कुमार सिंह, वार्ड 30 के पार्षद सुधीर चौधरी और संस्था संवेदना की टीम द्वारा फीता काटकर प्याऊ का उद्घाटन किया गया।
गर्मी की बढ़ती तपिश को देखते हुए इस छोटी सी पहल के तहत प्याऊ में मिट्टी के घड़ों का ठंडा पानी, नींबू शर्बत और गुड़-पानी की व्यवस्था की गई है। राहगीर, मजदूर, रिक्शा चालक या कोई भी प्यासा व्यक्ति बिना झिझक यहां रुककर प्यास बुझा रहा है।
संस्था के सदस्यों ने बताया कि दो दशक पहले तक शहर में जगह-जगह प्याऊ देखने को मिलती थीं। राहगीर, मजदूर, रिक्शा चालक या कोई भी प्यासा व्यक्ति बिना झिझक वहां रुकता, घड़े का ठंडा पानी पीता और दुआ देकर आगे बढ़ जाता। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में ये प्याऊ कहीं खो सी गईं।
थाना प्रभारी संजीव कुमार सिंह ने कहा, इंसानियत का सबसे सुंदर रूप ‘प्याऊ’ के रूप में दिखाई देता है। शहर के पुराने लोगों को आज भी वो दिन याद हैं जब लोग खुद आगे बढ़कर प्याऊ लगाते थे। संवेदना टीम की यह पहल सराहनीय है।
पार्षद सुधीर चौधरी ने कहा कि गर्मी को देखते हुए वार्ड के अन्य चौक-चौराहों पर भी प्याऊ लगाई जाएंगी। संस्था ने आम लोगों से भी अपील की है कि अपने घर-दुकान के बाहर एक घड़ा पानी का जरूर रखें।
संवेदना टीम ने बताया कि फिलहाल यह प्याऊ 15 मई तक रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी। जरूरत पड़ी तो अवधि बढ़ाई जाएगी। उद्घाटन के मौके पर संस्था के राजेश शर्मा, पिंटू सिंह, मनीष अग्रवाल समेत कई सदस्य मौजूद थे।
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