• Tue. Sep 29th, 2026

सरायकेला-खरसावां जिला में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने जारी किए कड़े निर्देश

admin's avatar

Byadmin

Sep 29, 2026
crescent ad

 

 

सरायकेला – जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर रुख अपनाया है। उपायुक्त सरायकेला-खरसावां की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कई चौंकाने वाले मामले सामने आने के बाद, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा पत्र जारी कर सभी स्कूलों के लिए 11 सूत्री गाइडलाइन अनिवार्य कर दी गई है।

ऑटो-टेंपो में लटककर सफर करने और नाबालिगों के ड्राइविंग पर रोक

समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि कई छात्र-छात्राएं स्कूल आने-जाने के क्रम में ऑटो, टेंपो या अन्य छोटे वाहनों में पीछे असुरक्षित तरीके से खड़े होकर या लटककर यात्रा करते हैं। इसके अलावा 18 वर्ष से कम उम्र के स्कूली बच्चे बिना लाइसेंस के मोटरसाइकिल और स्कूटी चला रहे हैं, जो एक गंभीर अपराध है। व्यस्त रास्तों और भारी भीड़ के कारण इससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

इसे देखते हुए जिले के सभी सरकारी, गैर-सरकारी और मान्यता प्राप्त माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों और प्रधानाध्यापकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

 

स्कूलों के लिए जारी किया गया 11 सूत्री आवश्यक दिशा-निर्देश:

छात्र-छात्राओं को नियमित रूप से सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की जानकारी दी जाए।

विद्यार्थियों को सड़क पार करने के लिए जेब्रा क्रॉसिंग, फुटपाथ और निर्धारित पैदल-पार पथ का ही उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए।

विद्यालय परिसर और उसके आसपास वाहन चलाते समय हेलमेट, सीट बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।

किसी भी परिस्थिति में नाबालिग विद्यार्थियों द्वारा वाहन चलाने को प्रोत्साहित न किया जाए और इस संबंध में उनके अभिभावकों को भी जागरूक किया जाए।

स्कूल बस, वैन या ऑटो आदि वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

स्कूल वाहनों के चालकों और संबंधित कर्मचारियों को यातायात नियमों, गति सीमा और बच्चों की सुरक्षा के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाया जाए।

स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय मुख्य द्वार के आसपास अनावश्यक भीड़ और वाहनों के जमाव को नियंत्रित करने की व्यवस्था की जाए।

 

छात्रों को सड़क पर मोबाइल फोन का उपयोग करने, तेज गति से सड़क पार करने, वाहनों के पीछे या सामने से अचानक निकलने और सड़क पर खेलने जैसी खतरनाक आदतों से बचने के लिए समझाया जाए।

स्कूलों में समय-समय पर ‘रोड सेफ्टी अवेयरनेस प्रोग्राम’, पोस्टर मेकिंग, निबंध और भाषण प्रतियोगिता तथा प्रार्थना सभा के माध्यम से सड़क सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

 

वर्षा, कोहरा अथवा अन्य प्रतिकूल मौसम की स्थिति में विद्यार्थियों की सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए और आवश्यकतानुसार अभिभावकों को भी सूचित किया जाए।

स्कूल परिसर के बाहर विद्यार्थियों के आने-जाने के दौरान (विशेषकर छोटे बच्चों के मामले में) शिक्षक और कर्मचारियों द्वारा आवश्यक निगरानी रखी जाए।

“सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।”

शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि इन दिशा-निर्देशों का विद्यालय स्तर पर गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। सड़क सुरक्षा के संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *