

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा, रांची में आयोजित छह दिवसीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग सह कार्यशाला का तीसरा दिन दिनांक 20.05.2026 (बुधवार) को सकारात्मक एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, पुष्पार्चन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया।

वैचारिक सत्र में प्रोफेसर (डॉ.) सविता सेंगर, कुलाधिपति, झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु संपूर्ण ब्रह्मांड का सार है। शिक्षा का उद्देश्य बंधनों से मुक्ति प्रदान करना तथा व्यक्ति का समग्र विकास करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की प्रमुख चुनौती बच्चों में भावनात्मक मजबूती एवं लचीलापन विकसित करना है। शिक्षा जीवन-दृष्टि के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने जीवन कौशल, अनुभव आधारित शिक्षा तथा मानसिक स्वास्थ्य के विकास पर विशेष बल दिया। साथ ही उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत प्राचीन एवं वैज्ञानिक है तथा शिक्षा के क्षेत्र में इसके नवाचारी प्रयोगों के माध्यम से भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
तत्पश्चात शिक्षकों ने सी.बी.एस.ई. इन-हाउस ट्रेनिंग के अंतर्गत भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अंतिम सत्र में शारीरिक गतिविधियों के अंतर्गत खेल, प्राणायाम एवं आसनों का अभ्यास सभी आचार्यों को कराया गया।
इस अवसर पर शिशु विकास मंदिर समिति के माननीय कोषाध्यक्ष श्री एस. वेंकट रमण, सदस्य श्री आशीष नाथ शाहदेव, श्री शंकर प्रसाद शुक्ला, श्री योगेश्वर दुबे, विद्यालय के प्राचार्य श्री ललन कुमार, उप-प्राचार्या सुश्री मीना कुमारी सहित सभी आचार्य एवं दीदीजी उपस्थित थे।
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